Jharkhand News: झारखंड में अब सभी श्रम न्यायालय नई पहचान के साथ काम करेंगे. राज्य सरकार ने फैसला लिया है कि लेबर कोर्ट अब औद्योगिक न्यायाधिकरण के नाम से जाने जाएंगे. ढांचे में भी बड़ा बदलाव किया जा रहा है. अभी तक हर लेबर कोर्ट में सिर्फ एक न्यायिक अधिकारी बैठते थे, लेकिन अब पहली बार इनके साथ प्रशासनिक अधिकारी भी जोड़े जाएंगे. यह प्रशासनिक सदस्य संयुक्त सचिव रैंक के होंगे. इसके साथ सभी औद्योगिक न्यायाधिकरण दो सदस्यीय पीठ के रूप में काम करेंगे. हालांकि फैसले की मुख्य शक्ति न्यायिक अधिकारी के पास ही केंद्रित रहेगी.
देश में चार श्रम संहिताएं लागू
केंद्र सरकार द्वारा देश में चार श्रम संहिताएं लागू करने के बाद झारखंड सरकार ने भी अपने स्तर पर संरचना को बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. श्रम नियोजन और प्रशिक्षण विभाग जल्द ही अधिसूचना जारी कर राज्य में नए ढांचे को लागू करेगा. फिलहाल रांची, धनबाद, बोकारो, देवघर, जमशेदपुर और हजारीबाग में लेबर कोर्ट कार्यरत हैं. रांची में एक औद्योगिक न्यायाधिकरण पहले से मौजूद है. अब राज्य में कार्यरत सभी संस्थान एक समान संरचना में परिवर्तित हो जाएंगे.
चार श्रम संहिताओं में शामिल औद्योगिक संबंध संहिता-2020 के प्रावधानों के अनुसार विवादों के निपटारे के लिए औद्योगिक न्यायाधिकरण गठित करने का अधिकार राज्य सरकार को दिया गया है. संहिता की धारा 44 में स्पष्ट प्रावधान है कि सरकार अधिसूचना जारी कर एक या अधिक औद्योगिक न्यायाधिकरण का गठन कर सकती है. इन्हें न केवल औद्योगिक विवादों के निपटारे का अधिकार होगा, बल्कि संबंधित अन्य मामलों की सुनवाई भी कर सकेंगे. प्रत्येक पीठ में एक न्यायिक सदस्य और एक प्रशासनिक सदस्य शामिल होगा. प्रशासनिक सदस्य वही व्यक्ति बन सकेगा जिसने केंद्र या राज्य सरकार में संयुक्त सचिव या उसके समकक्ष पद पर कार्य किया हो.
नए ढांचे से न्यायिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टिकोणों का समावेश
झारखंड में लेबर कोर्ट को औद्योगिक न्यायाधिकरण में बदलने का निर्णय श्रम कानूनों की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में कदम माना जा रहा है. नए ढांचे से न्यायिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टिकोणों का समावेश होगा जिससे सुनवाई की गति और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होंगी. केंद्र की श्रम संहिताओं के अनुरूप राज्य का यह कदम औद्योगिक विवादों को समय पर निपटाने में मदद कर सकता है. हालांकि यह भी देखने का विषय होगा कि नई प्रणाली में दो सदस्यीय पीठ किस तरह तालमेल के साथ काम करती है और इसका उद्योग जगत व श्रमिकों पर क्या वास्तविक असर पड़ता है.