SC के निर्देश के बाद प्रशासन अलर्ट
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद, राज्य के सभी साइबर थानों और पुलिस थानों से डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों का पूरा ब्योरा मांगा गया है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि अब ऐसे मामलों पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। यह कदम साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।
ऐसे होता है डिजिटल अरेस्ट स्कैम
साइबर ठग अक्सर खुद को CBI, ED या पुलिस अधिकारी बताकर पीड़ितों को निशाना बनाते हैं।
वे पीड़ितों को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर मोबाइल या लैपटॉप के जरिए घंटों तक बंधक बनाए रखते हैं। भय और मानसिक दबाव का फायदा उठाकर, ठग लाखों-करोड़ों रुपये अपने खाते में ट्रांसफर करा लेते हैं।
इस स्कैम के जरिए अब तक ₹3,000 करोड़ तक की ठगी हो चुकी है और इसके शिकार ज्यादातर बुजुर्ग नागरिक हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी गंभीर चिंता जताई है कि जालसाज धोखाधड़ी के लिए न्यायिक आदेशों और न्यायाधीशों के फर्जी हस्ताक्षरों का उपयोग कर रहे हैं। कोर्ट ने दूरसंचार विभाग को भी निर्देश दिए हैं कि एक व्यक्ति को एकाधिक सिम जारी न हों, ताकि साइबर अपराधों पर रोक लग सके।
न्यूज 26 जागरूकता संदेश
साइबर ठगी से बचें ऐसे कॉल्स से रहें सावधान अगर आपको CBI, ED, या पुलिस अधिकारी का कॉल आए और वे आपको डिजिटल अरेस्ट की धमकी दें, तो तुरंत कॉल काट दें। दस्तावेज की मांग करें, किसी भी अधिकारी द्वारा वीडियो कॉल पर दिखाए गए कोर्ट ऑर्डर या दस्तावेज पर विश्वास न करें। असली अधिकारी कभी भी फोन पर पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहेंगे। किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपने बैंक खाते या OTP की जानकारी कभी साझा न करें। अगर आपके साथ कोई ठगी होती है, तो तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल (cybercrime.gov.in) या अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं। याद रखें, डरना नहीं, सतर्क रहना है।