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  • 2025-12-15

Jharkhand News: धान अधिप्राप्ति की शुरुआत, पहले दिन 18786 क्विंटल खरीद के साथ 60 लाख क्विंटल के लक्ष्य पर नजर

Jharkhand News: राज्य सरकार ने सोमवार 15 दिसंबर से धान अधिप्राप्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है. पहले ही दिन शाम पांच बजे तक 18786.09 क्विंटल धान की खरीद दर्ज की गई. सरकार ने इस खरीफ सीजन में कुल 60 लाख क्विंटल धान खरीद का लक्ष्य तय किया है. इसके लिए राज्यभर से 2 लाख 51 हजार 182 किसानों ने पंजीकरण कराया है. इनमें से 3366 किसानों को खरीद से संबंधित एसएमएस भेजे जा चुके हैं, ताकि वे निर्धारित केंद्रों पर धान बेच सकें.

धान की खरीद 2450 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है
इस बार सरकार ने किसानों को बेहतर कीमत देने का दावा किया है. धान की खरीद 2450 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 50 रुपये अधिक है. पिछले सीजन में यह दर 2400 रुपये प्रति क्विंटल थी. राज्य में धान खरीद के लिए कुल 801 क्रय केंद्र बनाए गए हैं, जहां चरणबद्ध तरीके से खरीद की जा रही है.

तीन वर्षों में सरकार तय लक्ष्य के अनुसार धान की खरीद नहीं कर सकी
हालांकि बीते वर्षों का अनुभव सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है. पिछले तीन वर्षों में सरकार तय लक्ष्य के अनुसार धान की खरीद नहीं कर सकी. वर्ष 2022-23 और 2023-24 में लगातार सूखे की स्थिति और किसानों की उदासीनता के कारण सरकारी खरीद प्रभावित हुई. बड़ी संख्या में किसानों ने सरकारी व्यवस्था से दूरी बनाए रखी, जिससे लक्ष्य का केवल करीब एक तिहाई हिस्सा ही पूरा हो सका.

आंकड़ों पर नजर डालें तो वित्तीय वर्ष 2022-23 में 60 लाख क्विंटल के लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 17.16 लाख क्विंटल धान की खरीद हो पाई, जो कुल लक्ष्य का 29 प्रतिशत रहा. इसी तरह 2023-24 में भी लक्ष्य 60 लाख क्विंटल था, लेकिन खरीद 17.02 लाख क्विंटल तक ही सीमित रही. हालांकि 2024-25 में स्थिति कुछ बेहतर रही और 60 लाख क्विंटल के लक्ष्य के विरुद्ध 40.8 लाख क्विंटल धान की खरीद की गई, जो करीब 67 प्रतिशत रही.

बढ़ी हुई समर्थन कीमत और ज्यादा क्रय केंद्र किसानों को आकर्षित कर सकते हैं
इस साल धान खरीद की शुरुआत पहले दिन के आंकड़ों के लिहाज से सकारात्मक मानी जा रही है, लेकिन असली परीक्षा आने वाले हफ्तों में होगी. बढ़ी हुई समर्थन कीमत और ज्यादा क्रय केंद्र किसानों को आकर्षित कर सकते हैं, लेकिन भुगतान की गति और व्यवस्था की पारदर्शिता तय करेगी कि सरकार इस बार अपना 60 लाख क्विंटल का लक्ष्य हासिल कर पाती है या नहीं. पिछले वर्षों की विफलता को देखते हुए सरकार के सामने भरोसा बहाल करना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है.
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