Maxizone Chit Fund Scam: झारखंड में चर्चित Maxizone चिटफंड घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय को बड़ी वित्तीय अनियमितताओं के ठोस सबूत हाथ लगे हैं. ED की कार्रवाई से यह साफ होता जा रहा है कि निवेश के नाम पर जुटाई गई रकम को सुनियोजित तरीके से इधर-उधर किया गया और डिजिटल माध्यमों का भी इस्तेमाल हुआ.
कंपनी के 21 बैंक खातों में करीब 307 करोड़ रुपये जमा कराने से जुड़े सबूत मिले
ED की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार Maxizone से जुड़े ठिकानों पर की गई छापेमारी के दौरान 15 हजार क्रिप्टो करेंसी (USDT) के साथ-साथ नकद और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए. जांच में यह भी सामने आया है कि कंपनी के 21 बैंक खातों में करीब 307 करोड़ रुपये जमा कराने से जुड़े सबूत मिले हैं. ये लेनदेन अलग अलग माध्यमों से किए गए थे.
विज्ञप्ति में बताया गया है कि ED ने 16 सितंबर और तीन दिसंबर 2025 को Maxizone से जुड़े लोगों के परिसरों पर छापेमारी की थी. इस दौरान वित्तीय लेनदेन से संबंधित दस्तावेज, नकद लेनदेन के रिकॉर्ड, चेकबुक, डायरी में दर्ज हिसाब किताब, डिजिटल डिवाइस, 10 लाख रुपये नकद और 15 हजार (USDT) क्रिप्टो करेंसी जब्त की गई. USDT ऐसी क्रिप्टो करेंसी मानी जाती है, जिसकी कीमत को अमेरिकी डॉलर के बराबर रखने का प्रयास किया जाता है.
जांच एजेंसी के अनुसार Maxizone कंपनी के निदेशक चंद्रभूषण सिंह और उनकी पत्नी प्रियंका सिंह हैं. दोनों पर आम लोगों को अधिक मुनाफे का लालच देकर निवेश कराने और बाद में फरार हो जाने का आरोप है. इस कंपनी के खिलाफ जमशेदपुर सहित बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक में ठगी के मामलों में प्राथमिकी दर्ज है.
ED की जांच में यह भी पाया गया है कि ठगी से जुटाई गई राशि से बेनामी संपत्तियां खरीदी गईं और विभिन्न व्यवसायों में निवेश किया गया. छापेमारी के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की जांच के लिए चंद्रभूषण सिंह और प्रियंका सिंह को गिरफ्तार किया गया. दोनों पहले से जेल में बंद थे. न्यायालय के आदेश के बाद चंद्रभूषण सिंह को पांच दिनों के रिमांड पर लेकर ईडी की टीम पूछताछ कर रही है.
डिजिटल और अंतरराज्यीय नेटवर्क के जरिए आम निवेशकों के पैसों को छुपाने की कोशिश
Maxizone चिटफंड घोटाले में क्रिप्टो करेंसी और बड़े पैमाने पर बैंकिंग लेनदेन का सामने आना यह दर्शाता है कि ठगी के तरीकों में लगातार बदलाव हो रहा है. डिजिटल और अंतरराज्यीय नेटवर्क के जरिए आम निवेशकों के पैसों को छुपाने की कोशिश की गई. ईडी की जांच अब सिर्फ ठगी तक सीमित नहीं रहकर मनी लॉन्ड्रिंग और बेनामी निवेश की गहराई तक पहुंचती दिख रही है, जिससे आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.