Jamshedpur Crime News: जमशेदपुर के ओलीडीह क्षेत्र में बड़ी आपराधिक साजिश को पुलिस ने समय रहते नाकाम कर दिया. हत्या की योजना बनाकर बैठे चार युवकों को पुलिस ने हथियार के साथ धर दबोचा. गिरफ्तार किए गए आरोपियों में मोनी मोहंती उर्फ चितरंजन मोहंती, विकास मंडल, अंकित सिंह उर्फ बंगाली और प्रिंस कुमार शर्मा उर्फ बाबु उर्फ शूटर शामिल हैं. पुलिस के मुताबिक ये सभी शिवम मिश्रा नामक युवक के हत्या की योजना बना रहे थे.
क्या है पूरा मामला
पुलिस को देर रात गुप्त सूचना मिली थी कि जोतीडीह क्षेत्र के मुर्दा मैदान में कुछ युवक संदिग्ध हालात में जुटे हैं और किसी बड़ी वारदात की तैयारी कर रहे हैं. सूचना के आधार पर टीम ने इलाके की घेराबंदी की. जैसे ही पुलिस मौके पर पहुंची तो झाड़ियों के पास बैठे चार युवक भागने लगे. पीछा कर चारों को पकड़ लिया गया.
क्या बरामद हुआ
तलाशी के दौरान मोनी मोहंती के पास से एक देशी पिस्तौल और दो जिंदा कारतूस बरामद किए गए. इसके अलावा दो एंड्रॉयड मोबाइल फोन भी जब्त किए गए. पुलिस का कहना है कि हथियार पूरी तरह से इस्तेमाल के लिए तैयार था.
हत्या की साजिश का खुलासा
पूछताछ में मोनी मोहंती ने बताया कि आदर्शनगर निवासी शिवम मिश्रा ने उसकी भांजी से छेड़छाड़ की थी. इसी का बदला लेने के लिए गिरोह ने शिवम मिश्रा की हत्या की योजना बनाई थी. आरोपियों ने कई दिनों तक रेकी की और पहले भी शिवम मिश्रा के घर जाकर उसे धमकाने की कोशिश की थी. जिस दिन शिवम घर पर नहीं मिला उस दिन उसके परिजनों को डराया गया.
24 दिसंबर की रात हत्या की थी योजना
पुलिस के मुताबिक 24 दिसंबर की रात आरोपी एक बार फिर शिवम मिश्रा की हत्या की योजना बनाकर मौके पर जुटे थे. इसी दौरान पुलिस ने चारों को गिरफ्तार कर लिया और एक बड़ी घटना होने से पहले ही मामला संभाल लिया गया. पुलिस के अनुसार मोनी मोहंती उर्फ चितरंजन मोहंती पहले से कई गंभीर मामलों में संलिप्त रहा है. उसके खिलाफ मारपीट, रंगदारी, जानलेवा हमला, आर्म्स एक्ट और पोक्सो एक्ट जैसे मामलों में पहले भी केस दर्ज रहे हैं. पुलिस अन्य आरोपियों के आपराधिक इतिहास की भी जांच कर रही है.
छापामारी दल
इस कार्रवाई में शारीक अली, विष्णु चरण भोगता, विवेक पाल, विजय कुमार, अभिषेक कुमार और ओलीडीह ओपी के सशस्त्र बल शामिल रहे.
समय रहते पुलिस की कार्रवाई ने एक हत्या को टाल दिया
जमशेदपुर में लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं यह दिखाती हैं कि निजी बदले की भावना किस तरह संगठित अपराध का रूप ले लेती है. समय रहते पुलिस की कार्रवाई ने एक हत्या को टाल दिया लेकिन सवाल यह भी है कि हथियार और अपराधी इतनी आसानी से कैसे सक्रिय हो जाते हैं. जरूरत सिर्फ गिरफ्तारी की नहीं बल्कि ऐसे मामलों की जड़ तक पहुंचने की है ताकि कानून का डर सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे.