Jharkhand News: झारखंड में पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति को लेकर बना असमंजस अब जल्द समाप्त होने की कगार पर है. लंबे समय से प्रभारी व्यवस्था के तहत चल रहे पुलिस मुख्यालय को नए साल में नियमित नेतृत्व मिलने की संभावना मजबूत होती दिख रही है. सूत्रों के अनुसार मौजूदा प्रभारी डीजीपी तदाशा मिश्रा को सेवा विस्तार देने से जुड़ी कोई फाइल आगे नहीं बढ़ाई गई है. ऐसे में माना जा रहा है कि राज्य सरकार 1 जनवरी 2026 से पहले नए नियमित डीजीपी की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कर सकती है.
डीजीपी की नियुक्ति को लेकर सबसे अहम संकेत यह है कि अब तक आईपीएस अधिकारियों का पैनल संघ लोक सेवा आयोग को नहीं भेजा गया है. इससे स्पष्ट होता है कि
सरकार अब पारंपरिक यूपीएससी प्रक्रिया के बजाय अपनी नई झारखंड पुलिस महानिदेशक चयन एवं नियुक्ति नियमावली 2024 के तहत नियुक्ति करने की दिशा में आगे बढ़ रही है. इस नई नियमावली के लागू होने के बाद डीजीपी चयन की प्रक्रिया में बुनियादी बदलाव हुआ है.
वर्तमान हालात में डीजीपी पद की दौड़ में तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहे हैं. इनमें 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी अनिल पालटा शामिल हैं जो फिलहाल रेल डीजी के पद पर कार्यरत हैं. वहीं 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी प्रशांत सिंह वर्तमान में डीजी वायरलेस की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. तीसरे दावेदार 1992 बैच के ही आईपीएस अधिकारी मनविंदर सिंह भाटिया हैं जो इस समय डीजी होमगार्ड एवं फायर सर्विस के पद पर पदस्थापित हैं. तीनों अधिकारियों के पास लंबा प्रशासनिक अनुभव और पुलिस बल के संचालन का व्यापक अनुभव है जिसे चयन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
गौरतलब है कि पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद 6 नवंबर को तदाशा मिश्रा को झारखंड का प्रभारी डीजीपी नियुक्त किया गया था. उस समय वे गृह कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग में विशेष सचिव के पद पर कार्यरत थीं. प्रभारी डीजीपी बनाए जाने के बाद राज्य सरकार ने उन्हें डीजी रैंक में पदोन्नति दी थी. तदाशा मिश्रा 31 दिसंबर 2025 को सेवानिवृत्त हो रही हैं. इसी वजह से राज्य को नए डीजीपी की नियुक्ति करना अनिवार्य हो गया है.
हाल ही में झारखंड कैबिनेट ने झारखंड पुलिस महानिदेशक चयन एवं नियुक्ति नियमावली 2024 को मंजूरी दी है. इस नियमावली के तहत डीजीपी के चयन के लिए छह सदस्यीय नाम निर्देशन समिति का गठन किया गया है. इस समिति की अध्यक्षता झारखंड हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे. समिति में मुख्य सचिव यूपीएससी द्वारा नामित सदस्य जेपीएससी के अध्यक्ष या उनके नामित सदस्य एक सेवानिवृत्त डीजीपी और गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव या प्रधान सचिव या सचिव शामिल होंगे.
यह समिति डीजीपी पद के लिए न्यूनतम तीन और अधिकतम पांच अधिकारियों का पैनल तैयार करेगी. चयन केवल वरिष्ठता के आधार पर नहीं होगा बल्कि अधिकारी की योग्यता उपयुक्तता और नेतृत्व क्षमता को प्राथमिकता दी जाएगी. इसके तहत संबंधित अधिकारी का सेवा रिकॉर्ड प्रशंसा पत्र पुरस्कार पदक उपलब्धियां और पुलिस बल के नेतृत्व का अनुभव परखा जाएगा. साथ ही किसी भी प्रकार की विभागीय या अनुशासनात्मक कार्रवाई का विवरण भी समिति के समक्ष रखा जाएगा.
नई नियमावली में यह भी स्पष्ट किया गया है कि डीजीपी का न्यूनतम कार्यकाल दो वर्षों का होगा ताकि पुलिस प्रशासन में स्थिरता बनी रहे. यदि कोई अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत है तो उसके नाम पर विचार करने से पहले राज्य सरकार को केंद्रीय गृह मंत्रालय को इसकी सूचना देना अनिवार्य होगा.
पुरानी व्यवस्था में राज्य सरकार आईपीएस अधिकारियों का पैनल यूपीएससी को भेजती थी. यूपीएससी तीन नामों को स्वीकृति देकर राज्य को लौटाता था जिसके बाद सरकार उनमें से किसी एक अधिकारी को डीजीपी नियुक्त करती थी. नई नियमावली लागू होने के बाद यह प्रक्रिया पूरी तरह बदल गई है और अब डीजीपी चयन में राज्य स्तरीय नाम निर्देशन समिति की भूमिका सबसे निर्णायक हो गई है. ऐसे में आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि झारखंड पुलिस की कमान किस वरिष्ठ अधिकारी के हाथों सौंपी जाती है.