Jharkhand News: राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सियासी घमासान एक बार फिर तेज हो गया है. एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाए जाने के मामले को लेकर विपक्ष ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. इस मुद्दे को लेकर नेता प्रतिपक्ष ने सीधे स्वास्थ्य मंत्री को कठघरे में खड़ा किया है.
अमानवीय व्यवहार का शिकार हो रहे मासूम
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने स्वास्थ्य मंत्री पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने की घटना के बाद पीड़ित बच्चे केवल बीमारी से ही नहीं जूझ रहे हैं बल्कि उन्हें मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना का भी सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि जिन मासूमों को संवेदनशीलता संरक्षण और बेहतर इलाज मिलना चाहिए था वही आज उपेक्षा और अमानवीय व्यवहार का शिकार हो रहे हैं.
हिजाब और नकाब देखकर नौकरी देने जैसी घोषणाएं कर रहे हैं मंत्री
बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि एक ओर स्वास्थ्य मंत्री हिजाब और नकाब देखकर नौकरी देने जैसी घोषणाएं कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर उनके ही विभाग की लापरवाही के कारण कई बच्चों का जीवन संकट में पड़ गया है. उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकताएं पूरी तरह भटक चुकी हैं और असली मुद्दों से ध्यान हटाया जा रहा है.
प्रशासनिक तंत्र का नैतिक स्तर गिर चुका है
नेता प्रतिपक्ष ने अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि प्रशासनिक तंत्र का नैतिक स्तर गिर चुका है और अधिकारी सिर्फ उन्हीं आदेशों का पालन कर रहे हैं जो मुख्यमंत्री की ओर से आते हैं. बाकी समय लूट खसोट और निजी स्वार्थ साधने में व्यस्त रहने का आरोप भी उन्होंने लगाया.
बाबूलाल मरांडी ने चाईबासा के उपायुक्त से इस पूरे मामले का संज्ञान लेने की मांग की है. उन्होंने कहा कि पीड़ित बच्चों को तत्काल सहायता इलाज और सम्मानजनक व्यवहार मिलना चाहिए ताकि वे सामान्य जीवन की ओर लौट सकें.
सरकार की संवेदनशीलता और प्राथमिकताओं पर सवाल
यह मामला केवल एक स्वास्थ्य लापरवाही तक सीमित नहीं है बल्कि यह सरकार की संवेदनशीलता और प्राथमिकताओं पर भी सवाल खड़े करता है. एचआईवी जैसे गंभीर संक्रमण से प्रभावित बच्चों का सामाजिक बहिष्कार और मानसिक प्रताड़ना प्रशासनिक विफलता को उजागर करता है. विपक्ष का हमला यह संकेत देता है कि आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और गरमा सकता है. अगर सरकार समय रहते ठोस कदम नहीं उठाती है तो स्वास्थ्य व्यवस्था में भरोसा कमजोर होना तय है और इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा.