Jharkhand News: झारखंड आंदोलन की स्मृतियों और उसके नायकों को याद करने का दिन राजधानी रांची में भावनात्मक माहौल के साथ मनाया गया. राज्य के सर्वोच्च पद पर बैठे नेतृत्व ने आंदोलन की विरासत को नमन करते हुए उस संघर्ष को याद किया जिसने झारखंड को उसकी पहचान दिलाई. यह अवसर राज्य के इतिहास और उसके मूल विचारों को दोहराने का भी बना.
आज का दिन झारखंड के लिए विशेष महत्व रखता है
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन ने गुरुवार को झारखंड आंदोलन के अग्रणी नेता अमर वीर शहीद निर्मल महतो की जयंती पर रांची के जेल मोड़ स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की. इसके बाद मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि आज का दिन झारखंड के लिए विशेष महत्व रखता है.
वीर सपूतों का योगदान राज्य के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी और मूलवासी समाज के हक और अधिकार की लड़ाई लड़ने वाले वीर शहीद निर्मल महतो की यह 75वीं जयंती है. हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी पूरे राज्य में उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य के गठन को 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं और ऐसे वीर सपूतों का योगदान राज्य के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा.
राज्य के युवा उन्हें अपने मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत के रूप में देखते हैं
हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड आंदोलन में निर्मल महतो की भूमिका अमूल्य रही है. उनके विचार और आदर्श आज भी राज्य को दिशा देने का काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जिस उम्र में निर्मल महतो ने शहादत दी वह समय युवावस्था का था और आज राज्य के युवा उन्हें अपने मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत के रूप में देखते हैं.
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि झारखंड का हर युवा वीर शहीद निर्मल महतो पर गर्व करता है. आने वाले समय में भी राज्य उनके विचारों को आत्मसात करते हुए आगे बढ़ेगा और झारखंड आंदोलन की भावना को जीवित रखेगा.
शहीदों के योगदान को रेखांकित करना सामाजिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण
निर्मल महतो की जयंती पर दिया गया यह संदेश केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं है बल्कि यह झारखंड आंदोलन की मूल भावना को दोहराने का प्रयास भी है. मुख्यमंत्री के वक्तव्य से यह संकेत मिलता है कि राज्य सरकार अपनी राजनीति और नीतियों को आंदोलन के मूल विचारों से जोड़कर देखना चाहती है. ऐसे अवसरों पर युवाओं को आंदोलन के इतिहास से जोड़ना और शहीदों के योगदान को रेखांकित करना सामाजिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है.