Dumka: दुमका जिले में पत्रकारों के साथ हुए कथित मारपीट और दुर्व्यवहार के मामले में पुलिस प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हुए हमले को गंभीरता से लेते हुए दुमका के पुलिस अधीक्षक ने हंसडीहा थाना प्रभारी ताराचंद को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह निर्णय एसडीपीओ द्वारा की गई जांच और उनकी रिपोर्ट के आधार पर लिया गया, जिसमें थाना प्रभारी का आचरण अनुशासनहीन, अमर्यादित और पुलिस विभाग की छवि को ठेस पहुंचाने वाला पाया गया।
पत्रकार मृत्युंजय कुमार पांडे ने की शिकायत
इस पूरे प्रकरण की शिकायत दुमका जिले के वरिष्ठ पत्रकार मृत्युंजय कुमार पांडे ने पुलिस अधीक्षक से की थी। शिकायत के अनुसार 27 दिसंबर 2025 की रात वह पत्रकार नितेश कुमार वर्मा के साथ मंत्री संजय यादव की माता के श्राद्ध कार्यक्रम से लौट रहे थे। रास्ते में हंसडीहा चौक पर चाय पीने के लिए रुकने के दौरान उनकी मुलाकात थाना प्रभारी ताराचंद और उनके निजी चालक से हुई, जहां कथित तौर पर पुलिसकर्मियों ने उनके साथ असभ्य भाषा का प्रयोग किया।
आरोप है कि पत्रकारों द्वारा स्वयं का परिचय देने के बावजूद उनके साथ धक्का-मुक्की की गई और मारपीट भी हुई। पीड़ितों का कहना है कि मामला यहीं नहीं थमा, बल्कि उन्हें जबरन हंसडीहा थाना ले जाया गया, जहां कई घंटों तक बैठाकर रखा गया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
पत्रकारों द्वारा लगाए गए आरोपों की हुई पुष्टि
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने 28 दिसंबर को जरमुंडी के एसडीपीओ को पूरे घटनाक्रम की जांच का जिम्मा सौंपा। जांच के बाद 29 दिसंबर को सौंपी गई रिपोर्ट में पत्रकारों द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि हुई। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि थाना प्रभारी का व्यवहार न केवल अनुशासनहीन था, बल्कि पुलिस की गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों के भी खिलाफ था।
विभागीय कार्रवाई शुरू करने का आदेश
जांच रिपोर्ट के आधार पर दुमका एसपी ने थाना प्रभारी ताराचंद को निलंबित करते हुए निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय पुलिस केंद्र, दुमका निर्धारित किया है। साथ ही उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने का भी आदेश दिया गया है। इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में हलचल है और इसे पत्रकारों के सम्मान, सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के समर्थन में एक सख्त और अहम संदेश के रूप में देखा जा रहा है।