India Financial Loss: भारत में डिजिटल क्रांति ने जीवन को आसान बनाने के साथ-साथ साइबर अपराधों को भी तेजी से बढ़ावा दिया है. ताजा रिपोर्ट के अनुसार पिछले छह वर्षों में ऑनलाइन धोखाधड़ी और जालसाजी के कारण भारतीयों को कुल 52,976 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है. अकेले साल 2025 में लगभग 19,813 करोड़ रुपये की ठगी दर्ज की गई, जो डिजिटल सुरक्षा की कमजोरियों और अपराधियों के बढ़ते हौसले को दर्शाता है. यह आंकड़े केवल आर्थिक नुकसान ही नहीं बल्कि देशवासियों की ऑनलाइन सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल उठाते हैं.
पिछले दो सालों सबसे ज्यादा खतरनाक
आंकड़ों की समीक्षा बताती है कि साल 2020 में यह नुकसान केवल 8.56 करोड़ रुपये था, लेकिन 2025 तक यह 19,813 करोड़ तक पहुंच गया. साल 2024 में नुकसान 22,849 करोड़ तक पहुंच चुका था, जो पिछले दो सालों में सबसे खतरनाक साबित हुआ. साइबर अपराधी अब डिजिटल अरेस्ट और निवेश स्कैम जैसी नई तरकीबों का इस्तेमाल कर लोगों की जमा पूंजी हड़प रहे हैं.
महाराष्ट्र सबसे अधिक प्रभावित, 2.8 लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज
राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां 2025 में 3,203 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और 2.8 लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गईं. इसके बाद कर्नाटक 2,413 करोड़ और तमिलनाडु 1,897 करोड़ के नुकसान के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे. उत्तर प्रदेश और तेलंगाना भी शीर्ष पांच प्रभावित राज्यों में शामिल हैं, जो कुल नुकसान का बड़ा हिस्सा संभालते हैं.
लोगों को भारी मुनाफे का लालच देकर ठगी
धोखाधड़ी के प्रमुख तरीके निवेश योजनाओं के नाम पर लोगों को भारी मुनाफे का लालच देकर ठगी करना रहा, जो कुल नुकसान का 77 प्रतिशत है. इसके अलावा डिजिटल अरेस्ट के माध्यम से 8 प्रतिशत, क्रेडिट कार्ड फ्रॉड 7 प्रतिशत, सेक्सटॉर्शन 4 प्रतिशत और ई-कॉमर्स धोखाधड़ी 3 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं. यह आधुनिक समाज के लिए बड़ी चुनौती बन गया है.
45 प्रतिशत साइबर अपराध दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से संचालित
विशेषज्ञों का कहना है कि लगभग 45 प्रतिशत साइबर अपराध दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों जैसे कंबोडिया और म्यांमार से संचालित हो रहे हैं, जिससे इनसे निपटना और भी मुश्किल हो गया है. नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे अनजान लिंक पर क्लिक न करें और किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज की रिपोर्ट तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर करें. सतर्कता और तकनीक का सही इस्तेमाल ही डिजिटल धोखाधड़ी से सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है.
डिजिटल सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए ताकि आर्थिक नुकसान से बचा जा सके
भारत में साइबर अपराध की बढ़ती घटनाएं यह दर्शाती हैं कि डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन जीवन के साथ-साथ सुरक्षा उपायों को भी मजबूत करना जरूरी है. केवल तकनीक ही नहीं बल्कि जागरूक नागरिक ही इस खतरे से बचाव कर सकते हैं. यह समय है कि डिजिटल सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए ताकि आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव से बचा जा सके.