Amba Prasad PC: हजारीबाग के विष्णुगढ़ में हुई मासूम की वीभत्स नरबलि के मामले में अब झारखंड की सियासत के साथ-साथ जांच के तरीकों पर भी बड़ा बखेड़ा खड़ा हो गया है. कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव और बड़कागांव की पूर्व विधायक अम्बा प्रसाद ने हजारीबाग पुलिस की पूरी जांच प्रक्रिया और उसकी थ्योरी पर बेहद गंभीर सवाल खड़े किए हैं. रांची के मोरहाबादी स्थित प्रेस क्लब में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में अम्बा प्रसाद ने पुलिसिया कार्रवाई को एक "सुनियोजित पटकथा" (फिक्स्ड स्क्रिप्ट) करार दिया. उन्होंने साफ कहा कि प्रस्तावित बंदी और मशाल जुलूस को फिलहाल भले ही वापस ले लिया गया है, लेकिन पुलिसिया जांच में मौजूद गंभीर विसंगतियों पर वे कतई खामोश नहीं बैठेंगी.
“क्या सूचक और अभियुक्त एक ही हो सकते हैं?”
कांग्रेस नेत्री ने सीधे झारखंड की पुलिस महानिदेशक (DGP) तादाशा मिश्रा को संबोधित करते हुए पुलिस के दावों पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने मृतका की सगी मां को ही इस हत्याकांड का मुख्य आरोपी बनाए जाने पर गहरी हैरानी जताई. अम्बा प्रसाद ने पुलिस प्रशासन से तीखा सवाल पूछा कि क्या इस कानून में सूचक (शिकायतकर्ता) और अभियुक्त (आरोपी) एक ही व्यक्ति हो सकते हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस किसी गहरी साजिश के तहत पीड़ित परिवार को उलझा रही है ताकि उन्हें मिलने वाले सरकारी लाभ और मुआवजे से महरूम (वंचित) किया जा सके.
भीम राम को बचाने और डीएनए न कराने पर उठाए सवाल
अम्बा प्रसाद ने पुलिस की एफआईआर और गिरफ्तारी की टाइमलाइन को भी कटघरे में खड़ा किया. उन्होंने पूछा कि एफआईआर में नामजद धनेश्वर पासवान की इस पूरे कांड में क्या भूमिका थी और वह अब तक फरार क्यों है, पुलिस उसे पकड़ने में नाकाम क्यों रही? उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान पर उंगली उठाते हुए कहा कि आखिर किन तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूछताछ का दावा किया जा रहा है, जबकि इस जघन्य हत्याकांड में अब तक डीएनए (DNA) टेस्ट तक नहीं कराया गया है. उन्होंने दूसरे आरोपी भीम राम पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पुलिस की पूरी तफ्तीश उसे बचाने की दिशा में काम कर रही है.
पुलिस के 13 टीमों के गठन के दावे को बताया हास्यास्पद
प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व विधायक ने हजारीबाग पुलिस द्वारा मामले के खुलासे के लिए 13 विशेष टीमों के गठन और ताबड़तोड़ छापेमारी करने के दावे का जमकर मजाक उड़ाया. उन्होंने इसे पूरी तरह हास्यास्पद बताते हुए कहा कि जब घटना में शामिल सभी मुख्य आरोपी एक ही गांव में मौजूद थे, तो पुलिस को इतनी बड़ी फौज उतारने और छापेमारी का ड्रामा करने की क्या जरूरत आन पड़ी थी? अम्बा प्रसाद के इन तीखे सवालों ने जहां एक तरफ हजारीबाग पुलिस प्रशासन को बैकफुट पर धकेल दिया है, वहीं दूसरी तरफ सरकार में शामिल कांग्रेस और जेएमएम के बीच भी अंदरूनी खींचतान को सतह पर ला दिया है.