प्रभावित लोगों की संख्या में आई कमी, चराइदेव जिला सबसे ज्यादा प्रभावित
रविवार तक राज्य में बाढ़ से प्रभावित लोगों की संख्या 5.24 लाख से अधिक थी. सोमवार को यह घटकर 4,45,495 रह गई. इससे कई इलाकों में पानी उतरने के संकेत मिले हैं, लेकिन हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं.
एएसडीएमए के अनुसार सबसे अधिक असर चराइदेव जिले में देखा जा रहा है, जहां 1,88,404 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं. इसके बाद शिवसागर में 1,44,461 और जोरहाट में 74,458 लोग प्रभावित हैं. गोलाघाट, नगांव और कामरूप महानगर जिले में भी बाढ़ का असर बना हुआ है.
मौतों का आंकड़ा 68 पर कायम, 90 राहत शिविरों में 28 हजार से ज्यादा लोग
पिछले 24 घंटे में बाढ़ से किसी नई मौत की पुष्टि नहीं हुई है. इस वर्ष अब तक असम में बाढ़ के कारण 68 लोगों की जान जा चुकी है. प्रशासन राहत और बचाव कार्यों को लगातार जारी रखे हुए है
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बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए राज्यभर में 90 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं. इनमें 28,695 लोगों को ठहराया गया है. इसके अलावा 94 राहत वितरण केंद्रों के माध्यम से भोजन, पेयजल और अन्य जरूरी सामग्री पहुंचाई जा रही है.
राहत और बचाव अभियान जारी, धनसिरी दक्षिण नदी खतरे के निशान से ऊपर
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), सिविल डिफेंस और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से राहत और बचाव अभियान चला रहे हैं. प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए 67 नावें तैनात की गई हैं.
एएसडीएमए के मुताबिक गोलाघाट जिले के नुमालीगढ़ में धनसिरी दक्षिण नदी का जलस्तर अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है. प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और जरूरी सावधानी बरतने की अपील की है.
खेती, पशुधन और संपत्ति को भारी नुकसान, हालात पर प्रशासन की लगातार नजर
बाढ़ की वजह से 37,139.52 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है. तेज बहाव में 26,679 पशुओं के बह जाने की जानकारी सामने आई है. इसके अलावा कई स्थानों पर घरों, सड़कों, पुलों और सरकारी संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा है.
पानी का स्तर घटने के बावजूद प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है. प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए अतिरिक्त टीमें लगाई गई हैं. अभी तक इस संबंध में कोई अलग आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है और सभी पहलुओं से स्थिति की निगरानी की जा रही है.