Best Cooking Method: रसोई में खाना पकाने के तरीके समय के साथ बदलते जा रहे है. पहले ज्यादातर घरों में केवल गैस चूल्हे का इस्तेमाल होता था, लेकिन अब इंडक्शन कुकटॉप भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. बिजली से चलने वाला यह उपकरण खासकर शहरों में तेजी से इस्तेमाल किया जा रहा है. ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि गैस पर बना खाना ज्यादा बेहतर है या इंडक्शन पर बना भोजन शरीर के लिए ज्यादा सुरक्षित है. असल में खाना किस माध्यम से पकाया गया है उससे ज्यादा फर्क इस बात से पड़ता है कि भोजन कैसे और कितनी देर में पकाया गया है. फिर भी दोनों तरीकों के अपने फायदे और सीमाएं है जिन्हें समझना जरूरी है.
गैस चूल्हे पर खाना पकाने का तरीका
एलपीजी गैस पर खाना पकाने की परंपरा भारत में कई दशकों से है. गैस जलने पर सीधी लौ बनती है और उसी गर्मी से बर्तन और भोजन पकता है. इस तरीके की सबसे बड़ी खासियत यह है कि आंच को तुरंत कम या ज्यादा किया जा सकता है. यही वजह है कि रोटी, सब्जी और दाल जैसे कई पारंपरिक व्यंजन गैस पर आसानी से बन जाते है. हालांकि गैस के जलने से कुछ गैसें भी निकलती है जैसे कार्बन मोनोऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड. अगर रसोई में हवा का सही प्रवाह नहीं है तो लंबे समय तक इन गैसों के संपर्क में रहने से सांस से जुड़ी समस्याएं हो सकती है. इसलिए गैस पर खाना बनाते समय किचन में वेंटिलेशन होना जरूरी है.
इंडक्शन कुकटॉप कैसे काम करता है
इंडक्शन कुकटॉप बिजली की मदद से काम करता है. इसमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ऊर्जा पैदा होती है जो सीधे बर्तन को गर्म करती है. इसका मतलब यह है कि गैस की तरह इसमें खुली आग नहीं होती. इसी कारण इंडक्शन कुकिंग को कई लोग ज्यादा सुरक्षित मानते है. इंडक्शन पर खाना जल्दी पक जाता है क्योंकि गर्मी सीधे बर्तन तक पहुंचती है. इससे समय और ऊर्जा दोनों की बचत होती है. हालांकि इसमें केवल खास तरह के स्टील या आयरन के बर्तन ही इस्तेमाल किए जा सकते है.
क्या इंडक्शन से निकलने वाली तरंगें नुकसान करती है
इंडक्शन कुकिंग को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसके रेडिएशन को लेकर होती है. कई लोग सोचते है कि इसमें निकलने वाली मैग्नेटिक तरंगें शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है. वैज्ञानिक शोध बताते है कि इंडक्शन कुकटॉप से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ऊर्जा बहुत कम स्तर की होती है और यह केवल बर्तन के आसपास ही सीमित रहती है.यह मात्रा मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तुलना में भी कम मानी जाती है. हालांकि जिन लोगों के शरीर में पेसमेकर लगा होता है उन्हें इंडक्शन कुकटॉप से थोड़ी दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है.
पोषण के लिहाज से कौन सा तरीका बेहतर है
कई लोग मानते है कि इंडक्शन पर बना खाना कम पौष्टिक होता है, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से यह सही नहीं है. भोजन में मौजूद विटामिन और मिनरल इस बात पर निर्भर करते है कि खाना कितने तापमान पर और कितनी देर तक पकाया गया है. इंडक्शन पर खाना जल्दी पकता है इसलिए कई बार पोषक तत्व ज्यादा सुरक्षित रहते है. वहीं गैस पर धीमी आंच में पकने वाला भोजन कुछ खास व्यंजनों के लिए बेहतर माना जाता है क्योंकि इससे स्वाद और बनावट बेहतर हो जाती है.
सुरक्षा और उपयोग के मामले में अंतर
सुरक्षा के लिहाज से इंडक्शन कुकटॉप को ज्यादा सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इसमें खुली लौ नहीं होती. इससे आग लगने का खतरा कम रहता है और किचन का तापमान भी ज्यादा नहीं बढ़ता. छोटे घरों और फ्लैट में यह काफी सुविधाजनक विकल्प बन गया है. दूसरी तरफ गैस स्टोव की खासियत यह है कि यह बिजली पर निर्भर नहीं है. बिजली चली जाए तब भी गैस पर आसानी से खाना बनाया जा सकता है. इसलिए कई घरों में दोनों विकल्प मौजूद रहते है.
स्वास्थ्य के नजरिए से देखा जाए तो गैस और इंडक्शन दोनों पर बना खाना सुरक्षित माना जाता है. असली फर्क कुकिंग के तरीके और किचन के माहौल से पड़ता है. अगर रसोई में हवा का सही प्रवाह है तो गैस पर खाना बनाना बिल्कुल सुरक्षित है. वहीं आधुनिक और सुरक्षित विकल्प के रूप में इंडक्शन कुकटॉप भी अच्छा विकल्प माना जाता है. सबसे जरूरी बात यह है कि भोजन संतुलित तरीके से और सही तापमान पर पकाया जाए. ऐसा करने से खाना स्वादिष्ट भी रहेगा और शरीर के लिए फायदेमंद भी.