पंचशूल को विशेष वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के साथ उतारा गया
परंपरा के अनुसार बाबा बैद्यनाथ मंदिर और पार्वती मंदिर के शिखर पर स्थापित पवित्र पंचशूल को विशेष वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के साथ उतारा गया। यह पूरी प्रक्रिया उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा और पुलिस अधीक्षक सौरभ की मौजूदगी और निगरानी में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।
धार्मिक मान्यता के अनुसार पंचशूल उतरने के साथ ही भगवान बाबा बैद्यनाथ और माता पार्वती के बीच स्थापित आध्यात्मिक और पारंपरिक गठबंधन अस्थायी रूप से विराम में आ जाता है। महाशिवरात्रि के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना के बाद पंचशूल को पुनः मंदिर शिखर पर स्थापित किया जाएगा, जिसके साथ ही यह दिव्य परंपरा पुनः प्रारंभ होगी।
पंचशूल उतारने की इस दुर्लभ और पवित्र प्रक्रिया के साक्षी बने
पंचशूल उतारने की इस दुर्लभ और पवित्र प्रक्रिया के साक्षी बनने के लिए मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को देखते हुए व्यापक इंतजाम किए। मंदिर परिसर, शिवगंगा और शिव बारात मार्ग पर विशेष निगरानी, बैरिकेडिंग और आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की गईं।
पूरे वातावरण को भक्तिमय
धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण यह परंपरा केवल बाबा बैद्यनाथ धाम में ही निभाई जाती है। पंचशूल को आपस में मिलाकर एक साथ रखने की इस प्रक्रिया को देखने के लिए हर वर्ष हजारों श्रद्धालु देवघर पहुंचते हैं। यह अनूठी परंपरा महाशिवरात्रि के आगमन का आध्यात्मिक संदेश देती है और पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देती है।