पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा तुला राशि में गोचर कर रहे हैं. राहुकाल का समय दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 1 बजकर 43 मिनट तक रहेगा.
मां चंद्रघंटा की पूजा का महत्व
देवी भागवत पुराण में वर्णन है कि मां चंद्रघंटा की पूजा करने से जीवन के हर क्षेत्र में सफलता और उन्नति मिलती है. साथ ही मानसिक शांति और नई ऊर्जा का संचार होता है. माना जाता है कि इनकी आराधना से पारिवारिक सुख-समृद्धि बढ़ती है और नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं. विशेष रूप से सूर्योदय से पहले मां की पूजा करने का महत्व बताया गया है.
लाल और पीले गेंदे के फूल चढ़ाने की परंपरा है क्योंकि यह शक्ति और ममता का प्रतीक माने जाते हैं.
मां चंद्रघंटा का मंत्र
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः
इस मंत्र का कम से कम 108 बार जप करना श्रेष्ठ माना गया है.
मां चंद्रघंटा की आरती
जय मां चन्द्रघण्टा सुख धाम. पूर्ण कीजो मेरे काम॥
चन्द्र समाज तू शीतल दाती. चन्द्र तेज किरणों में समाती॥
मन की मालक मन भाती हो. चन्द्रघण्टा तुम वर दाती हो॥
सुन्दर भाव को लाने वाली. हर संकट में बचाने वाली॥
हर बुधवार को तुझे ध्याये. श्रद्धा सहित तो विनय सुनाए॥
मूर्ति चन्द्र आकार बनाए. सन्मुख घी की ज्योत जलाएं॥
शीश झुका कहे मन की बाता. पूर्ण आस करो जगत दाता॥
कांचीपुर स्थान तुम्हारा. कर्नाटिका में मान तुम्हारा॥
नाम तेरा रटू महारानी. भक्त की रक्षा करो भवानी॥
पूजा विधि
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें.
पूजा स्थल को शुद्ध कर चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और माता की प्रतिमा स्थापित करें.
कलश स्थापना के साथ मां को श्रृंगार सामग्री अर्पित करें, जिसमें लाल चुनरी, सिंदूर, चंदन, रोली, अक्षत और फूल शामिल हों.
भोग में खीर, हलवा या अन्य सात्विक भोजन अर्पित करें.
दीपक और धूपबत्ती जलाकर मां की आराधना करें.
चाहें तो दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और अंत में मां की आरती करें.
नवरात्रि का तीसरा दिन शक्ति और शांति दोनों का संगम है. मां चंद्रघंटा की कृपा से भक्तों के जीवन से संकट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है.