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  • 2026-03-11

Jharkhand News: असम के चाय बागानों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उठाई आदिवासी अधिकारों की आवाज

Jharkhand: असम की पहाड़ियों और विशाल चाय बागानों के बीच मंगलवार को एक खास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। Biswanath Chariali के मेजिकाजन चाय बागान में बड़ी संख्या में आदिवासी मजदूर, महिलाएं, बुजुर्ग और युवा एकत्र हुए। यह जागरूकता सभा Adivasi Student Union Of Assam, जारी शक्ति और Adivasi Council Of Assam के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई थी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शामिल हुए।

मजदूरों की उम्मीदों से भरा माहौल
सभा में भाग लेने के लिए कई मजदूर अपने दैनिक काम के बाद सीधे चाय बागान से पहुंचे थे। रोजाना जिन हाथों में चाय की पत्तियां तोड़ने की टोकरी रहती है, वही हाथ इस दिन अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर उम्मीदें लिए हुए थे। लोगों में यह जानने की उत्सुकता थी कि उनकी समस्याओं और अधिकारों की बात बड़े मंच से कैसे उठाई जा रही है।

हरियाली के पीछे छिपी कठिन सच्चाई
असम के चाय बागानों की हरियाली भले ही मनमोहक दिखाई देती है, लेकिन वहां काम करने वाले मजदूरों का जीवन काफी संघर्षपूर्ण है। पीढ़ियों से इन बागानों में काम कर रहे आदिवासी परिवार सुबह से शाम तक कड़ी मेहनत करते हैं। मजदूरों का कहना है कि लगातार मेहनत के बावजूद उन्हें सीमित मजदूरी मिलती है और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य सुविधाएं अब भी उनके लिए चुनौती बनी हुई हैं।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने संबोधन में कहा कि चाय उद्योग की असली पहचान इन मेहनतकश मजदूरों से ही है।

पहचान और अधिकार की मांग
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि असम में रहने वाले आदिवासी समुदाय को अभी भी अपनी पहचान और अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि कई पीढ़ियों से यहां रहने के बावजूद आदिवासी समाज को अब तक पूरी तरह उनका हक क्यों नहीं मिल पाया। उन्होंने लोगों से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की अपील की।

झारखंड आंदोलन का उदाहरण दिया
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने झारखंड राज्य के गठन के संघर्ष का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अलग राज्य बनने से पहले वहां के आदिवासी समाज को लंबे समय तक आंदोलन करना पड़ा था। इस आंदोलन में शिबू सोरेन सहित कई नेताओं ने अहम भूमिका निभाई थी। संघर्ष के दौरान कई लोगों ने बलिदान दिया, लेकिन समाज ने अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखी।

समाज के लिए बलिदान देने वालों को किया याद
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने आदिवासी अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले नेता प्रदीप नाग को भी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि समाज के अधिकारों के लिए किए गए ऐसे बलिदान लोगों को प्रेरित करते हैं और यह याद दिलाते हैं कि अधिकार पाने के लिए संघर्ष जरूरी होता है।

युवाओं से शिक्षा पर जोर देने की अपील
मुख्यमंत्री ने आदिवासी युवाओं से शिक्षा को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उनका कहना था कि जब समाज शिक्षित और जागरूक होगा, तभी वह अपने अधिकारों के लिए मजबूती से खड़ा हो सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान में आदिवासी समाज को कई अधिकार दिए गए हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें कानूनी तरीके से भी हासिल करना चाहिए।

नई उम्मीद के साथ घर लौटे लोग
सभा समाप्त होने के बाद भी लोग देर तक वहां चर्चा करते रहे। कई मजदूरों ने कहा कि अब उनकी आवाज पहले से ज्यादा मजबूत तरीके से उठ रही है। जब वे वापस अपने घरों की ओर लौटे, तो उनके कदम भले ही थकान से भारी थे, लेकिन मन में यह उम्मीद जरूर थी कि एक दिन उनकी मेहनत और अधिकारों को पूरा सम्मान मिलेगा।







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