Jharkhand News: झारखंड उत्पाद सिपाही परीक्षा पेपर लीक मामले में जेल में बंद छह आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सोमवार को अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत में सुनवाई पूरी हुई. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि जांच एजेंसी के पास पैसे के लेन-देन का कोई ठोस सबूत नहीं है, साथ ही अपनी दलीलों के समर्थन में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला भी दिया.
इन आरोपियों की याचिकाओं पर हुई सुनवाई
इस मामले में आरोपी आशीष कुमार, विकास कुमार, योगेश प्रसाद, रंजीत कुमार उर्फ चुनचुन, गुलाब चंद महतो और बुलबुल पांडे उर्फ राज की ओर से जमानत याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें से तीन को पेपर सॉल्वर गिरोह का एजेंट बताया गया है. अदालत के आदेश पर मामले के अनुसंधानकर्ता (IO) ने आरोपियों की केस डायरी और उनके आपराधिक इतिहास का रिकॉर्ड कोर्ट के समक्ष पेश किया. बता दें कि इस मामले में अब तक 161 आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है.
तमाड़ के रड़गांव से हुई थी सामूहिक गिरफ्तारी
गौरतलब है कि पुलिस ने बीते 11 अप्रैल को तमाड़ थाना क्षेत्र के रड़गांव स्थित एक अर्धनिर्मित भवन में गुप्त सूचना के आधार पर देर रात छापेमारी की थी. इस विशेष अभियान के दौरान मौके से 166 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें अंतरराज्यीय पेपर लीक और पेपर सॉल्वर गिरोह के पांच कथित सरगना भी शामिल थे. जांच के मुताबिक, इस पूरे खेल में मुख्य रूप से अतुल वत्स, विकास कुमार, शेर सिंह, आशीष कुमार और योगेश प्रसाद की भूमिका उजागर हुई थी.
अभ्यर्थियों को रटवाए जा रहे थे प्रश्न-उत्तर
जांच में यह बात सामने आई है कि गिरोह के एजेंट परीक्षा से ठीक पहले अभ्यर्थियों को प्रश्न और उनके उत्तर याद करवा रहे थे, जिसके लिए ही उन्हें रड़गांव में इकट्ठा किया गया था. गिरोह के सदस्यों ने सुरक्षा के तौर पर अभ्यर्थियों के मोबाइल फोन और एडमिट कार्ड अपने कब्जे में ले लिए थे और कुछ से बैंक चेक भी जमा कराए थे. इस पूरे फर्जीवाड़े को लेकर तमाड़ थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिसकी जांच जारी है.