Jharkhand News: झारखंड सरकार ने प्रशासनिक जवाबदेही और अनुशासन को लेकर इस वर्ष के पहले छह महीनों में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं. जनवरी से जून 2026 के बीच झारखंड राज्य प्रशासनिक सेवा के 17 अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू की गई, जबकि जांच में आरोप साबित नहीं होने पर पांच अधिकारियों को क्लीन चिट दी गई.
36 अधिकारियों के मामलों की हुई समीक्षा
सरकारी स्तर पर इस अवधि में कुल 36 अधिकारियों से जुड़े मामलों की समीक्षा की गई. जांच रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर सरकार ने अलग-अलग मामलों में कार्रवाई, राहत और दंड से संबंधित निर्णय लिए.
पांच अधिकारियों को मिली क्लीन चिट
जिन अधिकारियों को आरोपमुक्त किया गया है उनमें अनिल कुमार सिंह, जयदीप तिग्गा, जयवर्द्धन कुमार, प्रदीप कुमार और जय कुमार राम शामिल हैं. अनिल कुमार सिंह का निलंबन भी समाप्त कर दिया गया है.
कई अधिकारियों पर विभागीय जांच
सरकार ने मतियस विजय टोप्पो के खिलाफ नए सिरे से विभागीय कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया है. इसके अलावा अशोक राम, सुबोध कुमार, खाखा सुशील कुमार, मो. जफर हसनात, बिनय कुमार, संजय कुमार सिंह, जागो महतो और अमृता प्रियंका एक्का सहित कई अधिकारियों के खिलाफ जांच की प्रक्रिया शुरू की गई.
हरिश चंद्र मुंडा, महावीर सिंह, राजीव कुमार मिश्रा, लियाकत अली, अनिल कुमार यादव, मेरी मड़की, तेज कुमार हस्सा और जीत राय मुर्मु के मामले भी विभागीय जांच के दायरे में हैं.
दो अधिकारी निलंबित, कुछ मामलों में दंड बरकरार
सरकार ने आशुतोष कुमार और शैलेश कुमार को निलंबित किया है. वहीं प्रभात कुमार के खिलाफ पूर्व में दिया गया निंदन दंड यथावत रखा गया है. सेवानिवृत्त अधिकारी प्रदीप कुमार प्रसाद के मामले में भी जांच के बाद दंडात्मक कार्रवाई की गई है.
कुछ अधिकारियों को मिली राहत
गोपीनंदन प्रसाद, मनमोहन प्रसाद और सेवानिवृत्त अधिकारी विष्णु कुमार के खिलाफ लगाए गए दंड वापस ले लिए गए हैं. वहीं पवन कुमार मंडल और सेवानिवृत्त अधिकारी मोहित मुक्ति मंजर से जुड़े मामलों का निष्पादन कर फाइलें बंद कर दी गई हैं. नीतु कुमारी से संबंधित एक पुराने आदेश को भी निरस्त कर दिया गया है.
छह महीने का आंकड़ा
जनवरी से जून 2026 के बीच पांच अधिकारियों को क्लीन चिट मिली, 17 के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू हुई, दो अधिकारी निलंबित किए गए और कुछ मामलों में दंड बरकरार या वापस लिए गए. सरकार इसे प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया कदम मान रही है.