Jharkhand News: झारखंड सरकार ने बालू और अन्य लघु खनिजों के ठेकेदारों को बड़ी राहत देने की तैयारी कर ली है. अक्सर नीलामी के समय भारी-भरकम राशि एक साथ जमा करने में आने वाली दिक्कतों को देखते हुए अब भुगतान की प्रक्रिया को आसान बनाया जा रहा है. खान एवं भू-तत्व विभाग ने इसके लिए एक विशेष प्रस्ताव तैयार किया है, जिस पर अगली कैबिनेट बैठक में मुहर लग सकती है. इस कदम से सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि नीलामी प्रक्रिया में ज्यादा से ज्यादा लोग शामिल हो सकें और काम सुचारू रूप से चले.
किश्तों में भुगतान का क्या है पूरा गणित?
नए प्रस्ताव के मुताबिक ठेकेदारों को अब पूरी राशि एक साथ नहीं देनी होगी, बल्कि उन्हें तीन किश्तों की सुविधा मिलेगी. पहली किश्त कुल राशि का 50 प्रतिशत होगी, जो पहले साल का परमिट मिलते समय जमा करनी होगी. इसके बाद दूसरी किश्त 25 प्रतिशत और तीसरी किश्त भी 25 प्रतिशत होगी. यह भुगतान संबंधित वित्तीय वर्ष की अलग-अलग तिमाहियों में चेक के माध्यम से करने की छूट दी गई है, जिससे छोटे और मंझोले व्यापारियों पर अचानक आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा.
अन्य शुल्कों में कोई छूट नहीं, देरी पर लगेगा जुर्माना
हालांकि रॉयल्टी के भुगतान में राहत मिली है, लेकिन सरकार ने साफ कर दिया है कि अन्य करों में कोई ढील नहीं दी जाएगी. आयकर, पर्यावरण सेस, मैनेजमेंट फीस और स्टांप ड्यूटी जैसे खर्चों का भुगतान पहले की तरह ही करना होगा. इसके अलावा, यदि कोई ठेकेदार तय समय पर किश्त जमा करने में चूकता है, तो उस पर 25 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाया जाएगा. यह दंड राशि अधिकतम 2500 रुपये तक हो सकती है ताकि समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जा सके.
पारदर्शी व्यवस्था से राजस्व बढ़ाने की कोशिश
यह राहत सिर्फ बालू तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि राज्य के सभी प्रकार के लघु खनिजों से जुड़े ठेकेदारों को इसका लाभ मिलेगा. सरकार का मानना है कि इस लचीली नीति से न केवल ठेकेदारों को काम करने में आसानी होगी, बल्कि अवैध खनन पर भी लगाम लगेगी. अब सभी की नजरें प्रस्तावित कैबिनेट बैठक पर टिकी हैं, जहां इस फैसले पर अंतिम मुहर लगने के बाद इसे पूरे राज्य में लागू कर दिया जाएगा.