Jharkhand News: झारखंड हाईकोर्ट ने पलामू के युवक महफूज अहमद की हिरासत में मौत मामले में कड़ा रुख अपनाया है. न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान प्रस्तुत मेडिकल रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाए और उसे संदिग्ध माना.
साईदा खातून की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत को बताया गया कि युवक की चोटों का उल्लेख मेडिकल रिपोर्ट की फोटोकॉपी में किया गया था, जिसे सीजेएम अदालत में भी प्रस्तुत किया गया था. हालांकि हाईकोर्ट के समक्ष अब तक ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं किया गया.
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने मेदिनीनगर मेडिकल एवं सेंट्रल हॉस्पिटल के मेडिसिन सुपरिटेंडेंट, डिप्टी सुपरिटेंडेंट और ड्यूटी डॉक्टर को तलब किया है. कोर्ट ने निर्देश दिया है कि संबंधित अधिकारी उस फोटोकॉपी को भी साथ लेकर उपस्थित हों, जिसमें युवक की इंजरी रिपोर्ट दर्ज होने का दावा किया गया है. हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई 11 मई सुबह 10:30 बजे निर्धारित की है.
मामला पलामू के नावा बाजार थाना क्षेत्र से जुड़ा है. आरोप है कि महफूज अहमद को पुलिस हिरासत में लेकर एक मार्च से 4 मार्च के बीच प्रताड़ित किया गया. इसके बाद 5 मार्च को उसे मेदिनीनगर सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां मेडिकल फिट घोषित कर जेल भेज दिया गया. बाद में जेल में उसकी मौत हो गई.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर चोट के निशान मिलने की बात सामने आने के बाद मामला गंभीर हो गया. प्रार्थी पक्ष का आरोप है कि मेडिकल अधिकारियों ने जानबूझकर गलत रिपोर्ट तैयार की और घायल युवक को फिट घोषित कर दिया. अब इस पूरे मामले में अदालत ने संबंधित मेडिकल अधिकारियों से जवाब मांगा है.