Jharkhand News: झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश रंगन मुखोपाध्याय और न्यायाधीश प्रदीप श्रीवास्तव की खंडपीठ ने आतंकी संगठन ISIS के संदिग्ध उमर बहादुर उर्फ राहुल सेन की जमानत याचिका को नामंजूर कर दिया है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच में उमर के पास से भारी मात्रा में भड़काऊ और कट्टरपंथी सामग्री बरामद हुई थी. अदालत ने मामले की गंभीरता और देश की सुरक्षा के खतरों को देखते हुए उसे राहत देने से इनकार किया है.
सोशल मीडिया और साइबर समूहों के जरिए युवाओं को उकसाने का आरोप
जांच में यह तथ्य सामने आया कि उमर बहादुर उर्फ राहुल सेन आतंकवादी प्रचार सामग्री के प्रसार के लिए सोशल मीडिया पर ISIS से जुड़े कई सक्रिय साइबर समूहों का संचालन कर रहा था. वह इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए युवाओं को ISIS के प्रशिक्षण और वैचारिक वीडियो दिखाकर देश के खिलाफ हिंसक कार्रवाई के लिए उकसाने का काम करता था. उमर को 14 सितंबर 2023 को मध्य प्रदेश के रतलाम जिले से गिरफ्तार किया गया था.
मुख्य आरोपी फैजान अंसारी की जमानत भी पहले हो चुकी है खारिज
इस मामले के मुख्य आरोपी फैजान अंसारी की जमानत याचिका को झारखंड हाईकोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है. लोहरदगा निवासी फैजान अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में पढ़ाई के दौरान ISIS के प्रभाव में आया था. एजेंसियों से बचने के लिए वह “डार्क नेट” का सहारा लेता था और इसके जरिए भारत में सक्रिय मॉड्यूल के सदस्यों के साथ-साथ पाकिस्तान में बैठे अपने संपर्कों के साथ भी लगातार संवाद में था.
कड़ी निगरानी में झारखंड मॉड्यूल की जांच
झारखंड में ISIS की सक्रियता और मॉड्यूल के नेटवर्क को लेकर NIA बेहद सतर्क है. फैजान अंसारी और उमर बहादुर जैसे संदिग्धों की गिरफ्तारी से राज्य में फैले आतंकी नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में मदद मिली है. हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिकाओं को लगातार खारिज किए जाने से साफ है कि न्यायपालिका आतंकी गतिविधियों और भड़काऊ प्रचार के मामलों में किसी भी तरह की ढील देने के पक्ष में नहीं है.