Jharkhand Politics: प्रदेश भाजपा में लंबे समय से मिल रहे संकेत अब साफ हो गए हैं. मंगलवार को प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद के 21 सदस्यों के चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया पूरी हुई. दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक चले नामांकन के दौरान प्रदेश भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष आदित्य प्रसाद साहु ने ही अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया. किसी अन्य नेता के मैदान में न आने से उनका अध्यक्ष बनना तय हो गया है. इसकी औपचारिक घोषणा 14 जनवरी को की जाएगी.
केंद्रीय नेतृत्व की मौजूदगी में बनी सहमति
प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों के चुनाव के लिए पार्टी प्रभारी और केंद्रीय मंत्री जुएल उरांव एक दिन पहले ही रांची पहुंच गए थे. उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व के फैसले से प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं को अवगत कराया. आपसी सहमति के बाद किसी अन्य नेता ने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन नहीं किया. इससे चुनाव प्रक्रिया औपचारिक बनकर रह गई.
कार्यकारी अध्यक्ष से प्रदेश अध्यक्ष तक का सफर
विधानसभा चुनाव 2024 में जीत के बाद भाजपा ने बाबूलाल मरांडी को विधानसभा में प्रतिपक्ष का नेता बनाया था. इसके बाद संगठन की जिम्मेदारी संभालने के लिए रबींद्र कुमार राय की जगह आदित्य प्रसाद साहु को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया. उसी समय पार्टी के भीतर यह संकेत मिल गया था कि जिलाध्यक्षों का चुनाव पूरा होने के बाद प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी उन्हें ही सौंपी जाएगी. घटनाक्रम ठीक उसी दिशा में आगे बढ़ा.
ओबीसी समीकरण पर नजर
पार्टी से जुड़े जानकारों का मानना है कि झारखंड में आदित्य प्रसाद साहु को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने ओबीसी वोट बैंक पर फोकस किया है. संगठन के स्तर पर यह फैसला आने वाले चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखकर लिया गया माना जा रहा है. राज्य में ओबीसी समाज की भूमिका को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर इस कदम को देखा जा रहा है.
राष्ट्रीय परिषद के लिए भी नामांकन
प्रदेश अध्यक्ष के साथ साथ झारखंड से राष्ट्रीय परिषद के 21 सदस्यों के लिए भी नामांकन दाखिल किए गए. नियम के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष और विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता स्वतः राष्ट्रीय परिषद के सदस्य होते हैं. इस तरह झारखंड से राष्ट्रीय परिषद में कुल प्रतिनिधित्व और मजबूत होगा.
सामाजिक संतुलन दोनों को ध्यान में रखते हुए नेतृत्व का फैसला
भाजपा ने संगठनात्मक स्थिरता और सामाजिक संतुलन दोनों को ध्यान में रखते हुए नेतृत्व का फैसला किया है. आदित्य प्रसाद साहु का निर्विरोध चयन यह दिखाता है कि पार्टी ने अंदरूनी मतभेदों से बचते हुए एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की है. आने वाले समय में यह फैसला झारखंड की राजनीति और भाजपा की रणनीति पर किस तरह असर डालेगा, इस पर सबकी नजर रहेगी.