Jharkhand Politics: झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी मुकाबला अब निर्णायक दौर में पहुंच गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने खेमे को मजबूत रखने में जुटे हैं। जहां एनडीए अपने विधायकों को होटल में शिफ्ट कर रणनीति तैयार कर रहा है, वहीं महागठबंधन ने मुख्यमंत्री आवास को ही चुनावी रणनीति के केंद्र में बदल दिया है।
मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास में महागठबंधन के विधायकों की अहम बैठक हुई। बैठक में चुनावी तैयारियों से लेकर वोटिंग प्रक्रिया तक हर पहलू पर चर्चा की गई। इस दौरान विधायकों के बीच मॉक पोल यानी डमी वोटिंग भी कराई गई, जिसमें सभी विधायक शामिल हुए। खास बात यह रही कि मॉक वोटिंग में एक भी वोट रद्द नहीं हुआ।
राज्यसभा चुनाव में अक्सर तकनीकी गलती के कारण वोट अमान्य होने का खतरा रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए महागठबंधन ने पहले ही अपने विधायकों को वोटिंग प्रक्रिया की पूरी जानकारी देने और किसी भी गलती से बचने के लिए रिहर्सल कराया।
कांग्रेस के पर्यवेक्षक अजय शर्मा ने बैठक के बाद कहा कि महागठबंधन के पास 56 विधायकों का मजबूत समर्थन है और सभी विधायक एकजुट हैं। उन्होंने दावा किया कि दोनों सीटों पर गठबंधन के उम्मीदवारों की जीत तय है।
महागठबंधन अब अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटा है। बुधवार को भी विधायकों की दो अहम बैठकें प्रस्तावित हैं। पहली बैठक बीएनआर होटल में होगी, जहां चुनावी समीकरण और वोटों के गणित की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद शाम को एक बार फिर सभी नेता मुख्यमंत्री आवास में जुटेंगे और अंतिम रणनीति तैयार करेंगे।
इसके बाद महागठबंधन की ओर से संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एकजुटता का संदेश देने की तैयारी है।
कांग्रेस ने दिल्ली से उतारे वरिष्ठ नेता, पोलिंग और काउंटिंग पर रहेगी नजर
राज्यसभा चुनाव में सिर्फ विधायकों की संख्या ही नहीं, बल्कि मतदान और मतगणना की प्रक्रिया भी काफी अहम होती है। इसी को देखते हुए कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेताओं को रांची भेजा है।
कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू और सह प्रभारी श्रीबेला प्रसाद मतदान प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए पोलिंग एजेंट की भूमिका निभाएंगे। वहीं सांसद डॉ. सैयद नासिर हुसैन को काउंटिंग एजेंट बनाया गया है, जो मतगणना के दौरान मौजूद रहेंगे।
अब सबकी नजर 18 जून को होने वाली वोटिंग पर है। महागठबंधन का दावा है कि मॉक पोल में दिखी एकजुटता असली मतदान में भी बरकरार रहेगी, जबकि विपक्षी खेमे की रणनीति पर भी निगाहें टिकी हुई हैं।