National Politics: करीब दो दशक तक अरविंद केजरीवाल की विश्वस्त सहयोगी रहीं राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने आखिरकार आम आदमी पार्टी (AAP) को अलविदा कहकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ले ली है. 2006 से इंडिया अगेंस्ट करप्शन और फिर आप के हर संघर्ष में साथ खड़ी रहने वाली स्वाति का यह फैसला दिल्ली की राजनीति में एक बड़े भूकंप जैसा है. भाजपा मुख्यालय में पार्टी की सदस्यता लेते हुए स्वाति ने जो आरोप लगाए, वे केवल राजनीतिक नहीं बल्कि बेहद निजी और वैचारिक चोट हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण और अनुच्छेद 370 जैसे राष्ट्रीय मुद्दों पर पार्टी की नकारात्मक सोच ने उन्हें यह कठोर कदम उठाने पर मजबूर किया.
मीठे सपने से सौ करोड़ के महल तक का सफर
स्वाति मालीवाल ने अरविंद केजरीवाल पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें देशद्रोही तक कह डाला. उन्होंने आंदोलन के उन दिनों को याद किया जब केजरीवाल फटी पैंट और दो रुपये वाले पेन के साथ सादगी की मिसाल पेश करते थे. स्वाति ने तंज कसते हुए कहा कि जिस आदमी ने देश को बदलाव के मीठे सपने दिखाए, उसने सत्ता मिलते ही अपने लिए 100 करोड़ का आलीशान घर बनवा लिया. उन्होंने पंजाब सरकार को केजरीवाल का रिमोट कंट्रोल और ATM करार देते हुए आरोप लगाया कि दिल्ली के बाद अब पंजाब के संसाधनों का दोहन निजी हितों के लिए किया जा रहा है.
अस्तित्व की लड़ाई: मेरे साथ हुआ विश्वासघात
संपादकीय दृष्टिकोण से देखें तो स्वाति का सबसे दर्दनाक आरोप उनके साथ हुई शारीरिक प्रताड़ना और उसके बाद की राजनीतिक घेराबंदी है. उन्होंने दोहराया कि केजरीवाल के घर पर उनके साथ गुंडों ने मारपीट की और जब उन्होंने न्याय के लिए आवाज उठाई, तो पूरी पार्टी उनके खिलाफ खड़ी हो गई. स्वाति के अनुसार, पिछले दो साल से उन पर केस वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा था और संसद में उन्हें बोलने तक का समय नहीं दिया गया. उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जिस नेता के लिए उन्होंने अपना घर छोड़ा और सात साल झुग्गियों में बिताए, उसी ने उनकी गरिमा को सत्ता के अहंकार तले कुचलने की कोशिश की.
भाजपा के पाले में स्वाति: अब आगे क्या?
स्वाति मालीवाल का भाजपा में शामिल होना केवल एक व्यक्ति का दलबदल नहीं है, बल्कि यह केजरीवाल की महिला समर्थक छवि पर एक बड़ा प्रहार है. भाजपा के मूल्यों और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आस्था जताते हुए स्वाति ने साफ कर दिया कि वे अब एक अनुशासित कार्यकर्ता के रूप में काम करेंगी. उन्होंने अपनी राज्यसभा सीट तक कुर्बान करने की बात कहकर यह संदेश दिया है कि उनकी लड़ाई अब पदों के लिए नहीं, बल्कि सिद्धांतों के लिए है. आने वाले दिनों में स्वाति का यह बगावती तेवर पंजाब और दिल्ली की सियासत में आप के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकता है.