Ranchi News : झारखंड में ग्रामीण विकास विभाग की ओर से बनाए गए पुल और पुलियों के गिरने के मामलों को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने ग्रामीण विकास विभाग के सचिव से पूछा है कि राज्य में अब तक कितने पुल-पुलिया ध्वस्त हुए हैं और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों व एजेंसियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।
सचिव के बजाय चीफ इंजीनियर का हलफनामा दाखिल होने पर कोर्ट नाराज
पंकज कुमार यादव की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने विभागीय सचिव की ओर से शपथ पत्र दाखिल नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई। अदालत ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि सचिव की जगह चीफ इंजीनियर ने हलफनामा दाखिल किया। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या विभागीय सचिव को अदालत के आदेश की जानकारी नहीं थी।
आदेश की अनदेखी पर अवमानना की चेतावनी, 2 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने कहा कि फरवरी 2026 के आदेश में स्पष्ट रूप से ग्रामीण विकास विभाग के सचिव को शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद जवाब दाखिल नहीं किया जाना गंभीर मामला है और यह अदालत की अवमानना के दायरे में भी आ सकता है। कोर्ट ने सचिव को अगली सुनवाई तक विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई को निर्धारित की है। तब तक ग्रामीण विकास विभाग के सचिव को पुल-पुलियों के गिरने की घटनाओं, जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया और दोषियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा अदालत में प्रस्तुत करना होगा।