Ranchi News : समय से पहले सड़क निर्माण कार्य पूरा करने पर बोनस भुगतान को लेकर राज्य सरकार और छत्तीसगढ़ की एक निर्माण कंपनी के बीच चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। राज्य सरकार ने झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें ठेकेदार कंपनी को 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ बोनस राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था।
निर्धारित समय से पहले पूरा हुआ था सड़क निर्माण कार्य
यह मामला पोकला रेलवे स्टेशन से खुमारी तक लगभग 21.95 किलोमीटर सड़क के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण से जुड़ा है। पथ निर्माण विभाग ने वर्ष 2018 में करीब 49.16 करोड़ रुपये की इस परियोजना का टेंडर जारी किया था। यह कार्य छत्तीसगढ़ की कंपनी मेसर्स विनोद जैन को सौंपा गया था और इसे फरवरी 2020 तक पूरा करना था। कंपनी ने सितंबर 2019 में ही निर्माण कार्य पूरा कर दिया, जिसके बाद विभाग ने पूर्णता प्रमाणपत्र भी जारी किया। इसके बावजूद टेंडर की शर्तों के अनुसार मिलने वाली बोनस राशि का भुगतान नहीं किया गया।
बोनस स्वीकृत होने के बाद भी नहीं हुआ भुगतान
लंबे प्रयास के बाद पथ निर्माण विभाग ने नवंबर 2022 में छह प्रतिशत की दर से 2.08 करोड़ रुपये की बोनस राशि स्वीकृत की, लेकिन भुगतान फिर भी लंबित रहा। इसके बाद कंपनी ने हाईकोर्ट का रुख किया। सुनवाई के दौरान सरकार ने बोनस स्वीकृत होने की जानकारी दी, लेकिन बाद में कंपनी को पत्र भेजकर कहा कि वह टेंडर की शर्तों के अनुरूप कार्य पूरा नहीं करने के कारण बोनस की हकदार नहीं है।
हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
सरकार के इनकार के बाद कंपनी ने दोबारा हाईकोर्ट में याचिका दायर की। न्यायाधीश रंगन मुखोपाध्याय और न्यायाधीश दीपक रौशन की खंडपीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सरकार के बोनस निरस्त करने वाले आदेश को रद्द कर दिया और कंपनी को 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ बोनस राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया। अब राज्य सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। फिलहाल मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है।