Ranchi News : झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने सोमवार को हरमू स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल पर तीखा हमला बोला। उन्होंने भाजपा को "भारतीय गबन पार्टी" बताते हुए दावा किया कि वर्ष 2014 के बाद देश में 24 प्रकार के "गबन" हुए हैं। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों, सार्वजनिक संस्थानों, रोजगार, शिक्षा, कृषि, विदेश नीति और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए।
90,600 रुपये के खीरे का जिक्र कर साधा निशाना
प्रेस वार्ता की शुरुआत में सुप्रियो भट्टाचार्य अपने साथ एक खीरा लेकर पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी के बागान का 90,600 रुपये का खीरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री ने कृषि ऋण और सरकारी सब्सिडी का लाभ लिया, जबकि दूसरी ओर देश के कई राज्यों में किसान कर्ज के बोझ से आत्महत्या करने को मजबूर हैं। उन्होंने इसे "किसान गबन" की संज्ञा दी।
इसके साथ ही उन्होंने नोटबंदी को "करेंसी गबन" बताया। सरकारी उपक्रमों के निजीकरण को "पीएसयू गबन" और बैंकों के विलय तथा बड़े उद्योगपतियों के कर्ज माफ करने को "बैंक गबन" करार दिया।
जंगल, बंदरगाह और सरकारी संस्थानों को लेकर भी लगाए आरोप
सुप्रियो भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने जंगल, बंदरगाह, एयरपोर्ट और पहाड़ों को निजी कंपनियों के हवाले कर दिया। उन्होंने इसे क्रमशः "जंगल गबन", "समुद्र गबन", "आकाश गबन" और "पहाड़ गबन" बताया। वनतारा परियोजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने सरकारी पशुओं को निजी कंपनी को सौंपने का आरोप लगाया और इसे "पशु गबन" कहा।
उन्होंने पुलवामा और कारगिल के ताबूत मामले का जिक्र करते हुए "शहीद गबन" का आरोप भी लगाया। साथ ही विधायकों और सांसदों को तोड़कर सरकार बनाने, परिसीमन प्रक्रिया, मतदाता सूची, ईडी, सीबीआई, आयकर विभाग, यूपीएससी, यूजीसी, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और नीति आयोग जैसी संस्थाओं के कथित दुरुपयोग को "संस्थागत गबन" बताया।
रोजगार, शिक्षा और विदेश नीति पर भी साधा निशाना
झामुमो नेता ने कहा कि हर साल दो करोड़ रोजगार देने का वादा पूरा नहीं किया गया। उन्होंने नीट और वायुसेना भर्ती परीक्षा के पेपर लीक का हवाला देते हुए इसे "शिक्षा गबन" बताया। वहीं श्रम कानूनों और पीएफ-ईएसआई से जुड़े बदलावों को "मजदूर गबन" करार दिया।
विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अमेरिका के दबाव में काम कर रही है। साथ ही चुनावी भाषणों में दिए गए कुछ बयानों का जिक्र करते हुए इसे "सांप्रदायिक गबन" बताया। उन्होंने मणिपुर हिंसा और राम मंदिर भूमि खरीद मामले का भी उल्लेख किया तथा आरोप लगाया कि भूमि खरीद में अनियमितताएं हुईं, लेकिन किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई।
प्रधानमंत्री के पुराने बयान का किया जिक्र
प्रेस वार्ता के अंत में सुप्रियो भट्टाचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा कि "रुपये का गिरना देश का गिरना है।" उन्होंने दावा किया कि यही बात मोदी सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल पर भी लागू होती है। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।