Ranchi News : एफआईआर दर्ज नहीं करने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। एक क्रिमिनल अपील की सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए धनबाद एसएसपी को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि “जब शिकायत में संज्ञेय अपराध का स्पष्ट उल्लेख है, तो एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई?”यह मामला उस याचिका से जुड़ा है जिसमें पीड़िता ने आरोप लगाया कि जमानत पर रिहा होने के बाद आरोपी ने दोबारा अवैध गतिविधि की, जिसकी शिकायत साइबर पुलिस से की गई थी, लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। अदालत ने इस बिंदु पर खासी नाराजगी जताई है।
हाईकोर्ट ने पुलिस रवैये पर जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने कहा कि संज्ञेय अपराध की शिकायत के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं होना गंभीर मामला है। अदालत ने इसे कानून प्रक्रिया की अनदेखी मानते हुए धनबाद एसएसपी को मंगलवार को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया। कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद पुलिस प्रशासन में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि इस मामले में अदालत पुलिस की जवाबदेही तय करने के विचार में है।
जमानत रद्द याचिका की सुनवाई में उठा मामला
बताया जा रहा है कि अपीलकर्ता रवि साव को पहले जमानत मिल चुकी थी। इसके बाद पीड़िता ने जमानत रद्द करने की याचिका दायर की थी। उसी सुनवाई के दौरान शिकायत के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं होने का मुद्दा सामने आया, जिस पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया।
इस घटनाक्रम को न्यायिक सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है। अब सभी की नजर एसएसपी की अदालत में पेशी और कोर्ट के अगले आदेश पर टिकी हुई है।