Jharkhand News: झारखंड में राष्ट्रीय राजमार्गों का नेटवर्क तेजी से आकार ले रहा है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से संचालित सड़क परियोजनाओं में अब साफ तौर पर गति दिखने लगी है. साल 2026 तक राज्य में एनएचएआई की 10 अहम सड़क परियोजनाओं के पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है. इसके बाद 2027 में दो और हाईवे तैयार होंगे, जिससे झारखंड की कनेक्टिविटी नई ऊंचाई पर पहुंचेगी.
वाराणसी-रांची-कोलकाता कॉरिडोर पर जल्द शुरू होगा काम
राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार की इस कड़ी में वाराणसी-रांची-कोलकाता छह लेन एक्सप्रेसवे कॉरिडोर को बेहद अहम माना जा रहा है. इस परियोजना पर अगले दो माह के भीतर निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में दिल्ली में हुई समीक्षा बैठक के दौरान झारखंड को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया है.
सड़कें बन रहीं विकास की रीढ़
झारखंड में सड़कें अब केवल आवागमन का साधन नहीं रह गई हैं. ये राज्य के आर्थिक औद्योगिक और सामाजिक बदलाव की मजबूत बुनियाद बनती जा रही हैं. बेहतर रोड नेटवर्क से झारखंड का सीधा जुड़ाव बिहार पश्चिम बंगाल ओडिशा छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश से हो रहा है. इससे यात्रा का समय घट रहा है दूरी कम हो रही है और व्यापार उद्योग व रोजगार के नए अवसर सामने आ रहे हैं.
भूमि अधिग्रहण और क्लीयरेंस में आई तेजी
एनएचएआई झारखंड के मुख्य महाप्रबंधक सह क्षेत्रीय अधिकारी मुकुंदा टी अत्तरदे के मुताबिक राज्य सरकार के सहयोग से फॉरेस्ट क्लीयरेंस भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया में तेजी आई है. कुछ परियोजनाओं में भूमि हस्तांतरण और मुआवजा भुगतान को लेकर लगातार समीक्षा और विमर्श किया जा रहा है. इसका असर यह हुआ है कि कई परियोजनाएं तय समयसीमा के करीब पहुंच चुकी हैं.
रायपुर-धनबाद-कॉरिडोर से घटेगा सफर का समय
रायपुर धनबाद राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना को झारखंड के लिए गेम चेंजर माना जा रहा है. करीब 18 हजार करोड़ रुपये की लागत और 626 किलोमीटर लंबी इस परियोजना का 85 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. इसके शुरू होने के बाद यात्रा का समय 16 घंटे से घटकर करीब आठ घंटे रह जाएगा. झारखंड में इसका बड़ा हिस्सा ग्रीन फील्ड अलाइमेंट पर आधारित है.
दिल्ली-कोलकाता मार्ग होगा और मजबूत
दिल्ली-कोलकाता ग्रैंड ट्रंक रोड के अहम हिस्से एनएच-2 को छह लेन में बदला जा रहा है. बिहार-झारखंड सीमा के चोरदाहा से गोरहर तक 59 किलोमीटर लंबा हिस्सा इस परियोजना में शामिल है. इसमें से 51 किलोमीटर सड़क पहले ही छह लेन में तब्दील हो चुकी है. 1772 करोड़ रुपये की लागत से बन रही यह परियोजना दिसंबर 2026 तक पूरी होने की संभावना है. इसका 146 किलोमीटर हिस्सा झारखंड से होकर गुजरता है.
रांची-वाराणसी इकोनॉमिक कॉरिडोर से बदलेगा दक्षिण झारखंड
रांची-वाराणसी इकोनॉमिक कॉरिडोर को राज्य की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में गिना जा रहा है. करीब 13 हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना के जनवरी 2028 तक पूरा होने की उम्मीद है. इसके बन जाने से गढ़वा, पलामू, लातेहार और लोहरदगा जैसे जिलों में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी.
रांची-जमशेदपुर मार्ग पर एलिवेटेड कॉरिडोर की तैयारी
रांची-जमशेदपुर मार्ग को भी आधुनिक बनाने की दिशा में काम तेज है. जमशेदपुर में एनएच-33 यानी नए एनएच-18 पर 10 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की योजना है जिस पर 936 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इसके अलावा ग्रेड सेपरेटर और छह लेन एलिवेटेड फ्लाईओवर का भी प्रस्ताव है. वहीं वाराणसी-रांची-कोलकाता छह लेन हाईवे के 29 किलोमीटर हिस्से पर जल्द काम शुरू होने की उम्मीद है.
झारखंड अब इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर नई छलांग लगाने को तैयार
राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में आई तेजी से साफ है कि झारखंड अब इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर नई छलांग लगाने को तैयार है. बेहतर सड़कों से न सिर्फ राज्य की आंतरिक कनेक्टिविटी मजबूत होगी बल्कि झारखंड देश के बड़े आर्थिक केंद्रों से सीधे जुड़ सकेगा. आने वाले वर्षों में इन कॉरिडोरों का असर उद्योग निवेश रोजगार और क्षेत्रीय विकास पर साफ तौर पर दिखने की उम्मीद है.