Jharkhand News: गढ़वा जिले में यूरेनियम जैसे महत्वपूर्ण परमाणु खनिज के भंडार होने की संभावना सामने आई है. इसे लेकर केंद्र सरकार की प्रमुख एजेंसी परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय (AMD) की टीम जिले के अलग-अलग इलाकों में ड्रिलिंग कर सर्वे कार्य में जुटी है. यह सर्वे रमना और डंडई प्रखंड के कई क्षेत्रों में किया जा रहा है, जिससे इलाके में नई उम्मीदें जगी हैं.
जी-फोर से जी-टू चरण तक पहुंचा अन्वेषण
रमना प्रखंड के चुंदी, भागोडीह, जिरुआ और डंडई प्रखंड के करके क्षेत्र में यूरेनियम की मौजूदगी का पता लगाने के लिए जी फोर से जी टू चरण तक का काम जारी है. शुरुआती चरण में ड्रिलिंग के माध्यम से यूरेनियम की संभावना की पुष्टि की जाती है. इसके बाद जी टू चरण में गहराई तक ड्रिलिंग कर खनिज भंडार के आकार और गुणवत्ता का शुरुआती आकलन किया जाता है.
अनुकूल परिणाम पर बनेगी व्यवहारिक रिपोर्ट
यदि जी टू चरण में संतोषजनक परिणाम सामने आते हैं, तो इसके बाद व्यवहारिक रिपोर्ट तैयार की जाएगी. यह रिपोर्ट परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय की ओर से राज्य सरकार को सौंपी जाएगी. इसके आधार पर आगे खनन पट्टा देने से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया शुरू हो सकती है.
पांच वर्षीय कार्य योजना के तहत हो रहा सर्वे
यह पूरा अन्वेषण कार्य एजेंसी की पांच वर्षीय कार्य योजना 2024 से 2029 के तहत किया जा रहा है. योजना का उद्देश्य संभावित क्षेत्रों में यूरेनियम भंडार की पहचान करना और उनकी मात्रा व गुणवत्ता का वैज्ञानिक तरीके से मूल्यांकन करना है. एजेंसी की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि सर्वे कार्य सभी तकनीकी मानकों और सुरक्षा नियमों के तहत किया जा रहा है.
भविष्य की बड़ी परियोजना की संभावना
फिलहाल गढ़वा जिले में यूरेनियम खदान को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन चल रहा अन्वेषण भविष्य की बड़ी परियोजनाओं की ओर इशारा करता है. वर्तमान में झारखंड में यूरेनियम खनन पूर्वी सिंहभूम जिले के जादूगोड़ा, नरवापहाड़ और बादुहुरांग क्षेत्रों तक सीमित है. यदि गढ़वा में खोज सफल होती है, तो इससे न केवल जिले बल्कि पूरे राज्य के विकास को नई दिशा मिल सकती है.
यूरेनियम की संभावना राज्य के लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से अहम
गढ़वा में यूरेनियम की संभावना राज्य के लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से अहम मानी जा रही है. सफल अन्वेषण से झारखंड की भूमिका देश के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में और मजबूत हो सकती है. हालांकि अभी यह प्रक्रिया शुरुआती चरण में है, लेकिन इससे भविष्य में बड़े औद्योगिक और बुनियादी ढांचे के विकास के रास्ते खुल सकते हैं.