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  • 2026-01-10

Jharkhand Elephant Rescue: 9 दिनों तक दहशत फैलाने वाला खूंखार दंतैल हाथी काबू में, 20 लोगों की जान लेने के बाद ओडिशा–झारखंड सीमा से पकड़ा गया

Jharkhand: लगातार नौ दिनों तक दहशत फैलाने वाले और अब तक 20 लोगों की जान लेने वाले खूंखार दंतैल हाथी को आखिरकार पकड़ लिया गया है। ओडिशा और झारखंड की सीमा पर स्थित बेनीसागर जंगल में वन विभाग की संयुक्त टीम ने विशेषज्ञों की मदद से इस हाथी को घेरकर काबू में किया। देर रात तक चले इस ऑपरेशन में ओडिशा वाइल्डलाइफ टीम के साथ गुजरात, असम और एसओएस संस्था के विशेषज्ञ शामिल रहे।

तीन राज्यों की संयुक्त टीम को हाथी पकड़ने के लिए लगाया गया

शुक्रवार सुबह मझगांव प्रखंड के बेनीसागर गांव में हाथी ने तीन लोगों को कुचलकर मार डाला था, जिनमें हरकरा भी शामिल था। इसके साथ ही इस हाथी के हमलों में मृतकों की संख्या बढ़कर 20 हो गई। लगातार हो रही घटनाओं के बाद हाथी की तलाश और पकड़ के लिए तीन राज्यों की संयुक्त टीम को लगाया गया था।

पकड़ने के लिए भिन्न चीजों का इस्तेमाल किया गया 

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार ऑपरेशन के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब हाथी और टीम के बीच की दूरी केवल 100 मीटर रह गई थी। जिस इलाके में हाथी छिपा हुआ था, वह ओडिशा-झारखंड का सीमावर्ती क्षेत्र है। हाथी की निगरानी और उसे पकड़ने के लिए मशालों, थर्मल सेंसर से लैस ड्रोन और आधुनिक तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल किया गया।

हाथी को बेहोश होने में लगभग 20 से 25 मिनट लगता है 

वाइल्डलाइफ ओडिशा के ट्रेंकुलाइजेशन विशेषज्ञ डॉ. बानराज ने बताया कि हाथी को बेहोश होने में लगभग 20 से 25 मिनट का समय लगता है। उन्होंने कहा कि अगर ट्रेंकुलाइजेशन में जरा भी चूक होती तो हाथी और ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता था, इसलिए पूरी प्रक्रिया बेहद सतर्कता के साथ की गई।

शुक्रवार को हाथी ने किया हमला 

इससे पहले शुक्रवार को हाथी ने बेनीसागर जंगल में उसे देखने गए 11 वर्षीय बोदरा और जेसीबी चालक प्रकाश कुमार पान को पटक-पटक कर मार डाला था। इसके बाद हाथी दोनों शवों को करीब 10 घंटे तक जंगल में घसीटता रहा। हमले में प्रकाश कुमार का सिर धड़ से अलग हो गया था।

बंगाल की टीम ने हाथी भगाने के अभियान से खुद को किया अलग 

उसी दिन दोपहर करीब 1:30 बजे बंगाल के बांकुड़ा से आई हाथी भगाने वाली टीम के सदस्य सुखराम बेसरा (57) पर भी हाथी ने हमला कर दिया। हाथी ने सुखराम को उठाकर दूर फेंक दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। इलाज के दौरान ओडिशा के करंजी अस्पताल में उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद बंगाल की टीम ने हाथी भगाने के अभियान से खुद को अलग कर लिया था।
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