Jharkhand News: झारखंड सरकार ने राज्य के पुराने और जर्जर सरकारी भवनों के पुनर्विकास (रीडेवलपमेंट) का जिम्मा अब नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (NBCC) को सौंपने का फैसला किया है. इस संबंध में सरकार ने विस्तृत दिशा-निर्देश यानी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी कर दिया है. अभी तक यह काम राज्य के स्थानीय ठेकेदारों के माध्यम से कराया जाता था.
NBCC भारत सरकार के आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय के तहत काम करने वाली एक नवरत्न सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है. इस संस्था ने दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में बड़े और महत्वपूर्ण भवन परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा किया है. राज्य सरकार का मानना है कि NBCC के जरिए पुनर्विकास कराने से सरकारी भवनों की गुणवत्ता बेहतर होगी और काम समय पर पूरा होगा.
राज्य में कई सरकारी कार्यालय और आवासीय परिसर बेहद जर्जर हालत में हैं. इनमें डोरंडा के 56 सेट सरकारी भवन, रातू रोड स्थित दुर्गा मंदिर के पास का आवासीय परिसर, पुराना विधानसभा परिसर, रिम्स परिसर, एचईसी क्षेत्र में केंद्रीय पुल के पास बने आवास सहित कई अन्य भवन शामिल हैं.
सरकार के अनुसार, इन पुराने भवनों की मरम्मत और रखरखाव पर हर साल बड़ी राशि खर्च होती है. यदि इन भवनों का रीडेवलपमेंट NBCC से कराया जाता है तो लंबे समय में रखरखाव के खर्च में भारी कमी आएगी. इसके साथ ही जर्जर सरकारी परिसरों को अतिक्रमण से भी बचाया जा सकेगा.
इसी उद्देश्य से सरकार ने NBCC के साथ परियोजना- दर - परियोजना समझौता (MOU) करने के लिए एक स्पष्ट SOP तैयार की है.
SOP के मुख्य बिंदु
- भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता अपने क्षेत्र के जर्जर और पुनर्विकास योग्य भवनों की पहचान करेंगे.
- चिह्नित भवनों की सूची अधीक्षण अभियंता के माध्यम से मुख्य अभियंता को भेजी जाएगी.
- मुख्य अभियंता यह सूची NBCC को उपलब्ध कराएंगे.
- सूची मिलने के बाद NBCC के अधिकारी स्थल निरीक्षण करेंगे, जिसमें भवन निर्माण विभाग सहयोग करेगा.
- NBCC परियोजना का वित्तीय प्रस्ताव और MOU का प्रारूप तैयार कर विभाग को सौंपेगी.
- मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति प्रस्ताव की समीक्षा करेगी, इसके बाद मूल्य वार्ता और MOU पर निर्णय लिया जाएगा.
- विभागीय सहमति के बाद विधि विभाग और फिर कैबिनेट से स्वीकृति ली जाएगी.
- कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद भवन निर्माण विभाग NBCC के साथ MOU करेगा.
- इसके बाद देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से तकनीकी जांच कराई जाएगी.
सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था से झारखंड के सरकारी भवनों को आधुनिक, सुरक्षित और टिकाऊ बनाया जा सकेगा.