Jharkhand News: झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने केंद्र सरकार से मांग की है कि बिहार की तर्ज पर झारखंड में भी मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं को कुटीर उद्योग शुरू करने के लिए 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए. उन्होंने कहा कि इससे राज्य की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी.वित्त मंत्री ने बताया कि फिलहाल झारखंड सरकार करीब 5 लाख महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये की सहायता दे रही है.अब जरूरत है कि केंद्र सरकार भी इसमें सहयोग करे, ताकि महिलाएं छोटे उद्योग शुरू कर सकें और रोजगार के नए अवसर पैदा हों.
शनिवार को नई दिल्ली में केंद्र सरकार के आगामी बजट से पहले आयोजित विचार-विमर्श बैठक में वित्त मंत्री ने झारखंड के समग्र विकास के लिए विशेष आर्थिक सहायता की मांग की. उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य गठन के 25 साल पूरे होने के बावजूद आज भी सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ है.उग्रवाद, गरीबी, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और कमजोर बुनियादी ढांचा राज्य की बड़ी समस्याएं हैं.
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से उग्रवाद पर काफी हद तक काबू पाया गया है, लेकिन इसे पूरी तरह खत्म करने के लिए अभी और मदद की जरूरत है.
स्वास्थ्य और सिंचाई पर खास जोर
वित्त मंत्री ने राज्य में बढ़ते कैंसर के मामलों पर चिंता जताई. उन्होंने मांग की कि रांची, पलामू, दुमका और धनबाद में पेट-सीटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध कराई जाए. साथ ही जिला अस्पतालों में मैमोग्राफी की व्यवस्था की जाए, ताकि समय पर जांच और इलाज हो सके.
इसके अलावा उन्होंने सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की. उन्होंने कहा कि अगले चार वर्षों में एक लाख हेक्टेयर खेतों में सिंचाई सुविधा विकसित करने के लिए हर साल 2000 करोड़ रुपये की जरूरत है. राज्य में कुल 12 लाख हेक्टेयर खेतों तक सिंचाई पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है.
पर्यटन विकास के लिए सहयोग की मांग
वित्त मंत्री ने नेतरहाट, तेनुघाट, चांडिल, पतरातू और बेतला जैसे पर्यटन स्थलों के विकास के लिए केंद्र से सहयोग मांगा. साथ ही मलूटी, वैद्यनाथ धाम, बंशीधर मंदिर, पारसनाथ मंदिर, देवरी मंदिर और अंजनधाम को जोड़कर टूरिस्ट कॉरिडोर विकसित करने की भी मांग की.
खनन कंपनियों से सामाजिक योगदान की अपील
उन्होंने कहा कि झारखंड में सीसीएल, बीसीसीएल, ईसीएल, एनटीपीसी, सेल और टाटा स्टील जैसी बड़ी कंपनियां करीब 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में खनन कर रही हैं और अरबों रुपये का मुनाफा कमा रही हैं, लेकिन उनका सामाजिक योगदान बहुत कम है.
वित्त मंत्री ने मांग की कि इन कंपनियों को बिरसा मुंडा और डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम पर विश्वविद्यालय खोलने, गुमला में जनजातीय मेडिकल कॉलेज स्थापित करने, राज्य में स्पोर्ट्स विश्वविद्यालय और आयुष कॉलेज खोलने के निर्देश दिए जाएं, ताकि स्थानीय लोगों को शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें.