अपील में कहा गया है कि पूर्व रिज़ोल्यूशन प्रोफेशनल शशि अग्रवाल ने दिल्ली उच्च न्यायालय के 06.01.2016 के आदेश, जिसमें इंकैब कंपनी की बैंकों की कुल देनदारी 21.63 करोड़ तय की गयी थी, को दरकिनार कर कमला मिल्स और पेगासस के 2009 करोड़ की कथित फर्जी दावेदारी स्वीकार कर ली थी।
एनसीएलएटी ने दिल्ली उच्च न्यायालय के 06.01.20216 के आदेश के मद्देनज़र शशि अग्रवाल के द्वारा कमला मिल्स और पेगासस के साथ मिलकर किये गये फर्जीवाड़े को आपराधिक कदाचार घोषित करते हुए शशि अग्रवाल को अपने 04.06.2021 के आदेश के द्वारा रिज़ोल्यूशन प्रोफ़ेशनल के पद से हटा दिया और उसके कदाचार की विस्तार से जांच करने की ज़िम्मेदारी आईबीबीआई को सौंप दी। आईबीबीआई ने शशि अग्रवाल के कदाचार की जांच कर अपने 13.05.2022 के आदेश द्वारा उसे रिज़ोल्यूशन प्रोफ़ेशनल बनने की अर्हता को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया। एनसीएलएटी ने शशि अग्रवाल द्वारा किये गये सारे क्रियाकलापों को अवैध घोषित करते हुए उसके द्वारा बनाए गये लेनदारों की कमेटी जिसमें कमला मिल्स और पेगासस शामिल थे, को भी अवैध घोषित कर दिया। मजदूरों ने अपने अपील में बताया है कि कमला मिल्स ने फर्जी दावा किया था, कि उसने आईसीआईसीआई से इंकैब कंपनी की एनपीए को 21.06.2006 को ख़रीदा और पेगासस ने कथित तौर पर फर्जी दावा किया था कि उसने एक्सिस बैंक की इंकैब कंपनी की एनपीए को 20.03.2016 को ख़रीदा और उसके आधार पर लेनदारों की कमेटी में अपना दावा पेश किया।