Jharkhand News: शराब घोटाले से जुड़े मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए हैं. एसीबी के हाथों गिरफ्तार कारोबारी महेश शिडगे, परेश ठाकोर और विक्रम ठाकुर को डिफॉल्ट बेल दे दी गई है. यह राहत उन्हें इसलिए मिली क्योंकि तय समय सीमा के भीतर एसीबी इनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई.
विशेष अदालत से मिली जमानत की सुविधा
मंगलवार को रांची एसीबी की विशेष अदालत ने तीनों आरोपियों को डिफॉल्ट बेल की सुविधा प्रदान की. अदालत ने माना कि कानून के प्रावधानों के तहत आरोपियों को यह अधिकार प्राप्त है. इसके बाद उनकी जमानत का रास्ता साफ हो गया.
अक्टूबर से न्यायिक हिरासत में थे आरोपी
एसीबी ने इन तीनों कारोबारियों को अक्टूबर महीने में गुजरात से गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी के बाद से वे न्यायिक हिरासत में रांची स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा होटवार में बंद थे. लंबे समय तक चार्जशीट दाखिल नहीं होने के कारण उन्हें यह कानूनी राहत मिली.
मैन पावर सप्लाई से जुड़ा है मामला
जांच के अनुसार तीनों आरोपियों की कंपनी ने वर्ष 2022-23 के दौरान झारखंड में मैन पावर की सप्लाई का काम किया था. इसी से जुड़े कथित अनियमितताओं के आधार पर यह पूरा मामला सामने आया था.
अन्य आरोपियों को भी पहले मिल चुकी है राहत
इस केस में प्रमुख अभियुक्त आईएएस विनय चौबे समेत अन्य आरोपियों को भी चार्जशीट दाखिल नहीं होने के कारण पहले ही डिफॉल्ट बेल मिल चुकी है. ऐसे में यह मामला एसीबी की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.
जांच की गति और कानूनी तैयारी में कमी
शराब घोटाले से जुड़े इस मामले में लगातार चार्जशीट दाखिल न होना जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर असर डालता दिख रहा है. एक के बाद एक आरोपियों को डिफॉल्ट बेल मिलना यह संकेत देता है कि जांच की गति और कानूनी तैयारी में कमी रही है. इससे न केवल एजेंसी की साख पर सवाल उठते हैं बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों में अभियोजन की मजबूती भी चुनौती बन सकती है.