Jharkhand News: झारखंड सरकार वन विभाग में कार्यरत वन रक्षियों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है. राज्य के 1315 वन रक्षियों को जल्द पदोन्नति दी जाएगी. वन विभाग ने इससे संबंधित सूची तैयार कर ली है और विभागीय मंत्री की मंजूरी के बाद अधिसूचना जारी होने की संभावना जताई जा रही है. सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री के विदेश दौरे से लौटने के बाद सूची को अंतिम स्वीकृति मिल सकती है.
पद सृजन के बाद भी वर्षों तक अटका रहा मामला
राज्य में वनों की सुरक्षा के लिए कुल 3883 वन रक्षियों के पद सृजित किए गए थे. वर्ष 2014 में इनमें से 1315 पद समाप्त कर प्रधान वन रक्षी का नया पद बनाया गया. हालांकि पदोन्नति से जुड़ी स्पष्ट नियमावली नहीं होने के कारण वन रक्षियों को लंबे समय तक इसका लाभ नहीं मिल सका. इससे विभाग में असंतोष की स्थिति बनी रही.
2024 में नियमावली को मिली मंजूरी
वन रक्षियों की इस लंबित समस्या के समाधान के लिए वर्ष 2024 में पदोन्नति नियमावली को मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली. इसके बाद वन विभाग ने पदोन्नति प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की दिशा में काम शुरू किया. नियमावली के तहत आठ वर्ष की सेवा पूरी करने वाले वन रक्षी पदोन्नति के लिए पात्र माने गए हैं.
1600 में से 1315 रक्षी बने पात्र
वर्तमान समय में राज्य में करीब 1600 वन रक्षी कार्यरत हैं. इनमें से 1315 वन रक्षियों ने आठ वर्ष या उससे अधिक की सेवा पूरी कर ली है. ऐसे सभी पात्र वन रक्षियों को प्रधान वन रक्षी के पद पर पदोन्नति देने की तैयारी की गई है. विभाग का मानना है कि इससे फील्ड लेवल पर कार्यरत कर्मियों को सीधा लाभ मिलेगा.
पदोन्नति के लिए नया पद भी सृजित
पदोन्नति प्रक्रिया को सुचारू और व्यवस्थित बनाने के लिए विभाग ने प्रधान मुख्य वन रक्षी का नया पद भी सृजित किया है. विभाग द्वारा तैयार की गई पदोन्नति सूची को विभागीय मंत्री की स्वीकृति के बाद लागू किया जाएगा. इसके साथ ही वर्षों से प्रतीक्षित प्रक्रिया को औपचारिक रूप से पूरा किया जाएगा.
मनोबल बढ़ाने और वन सुरक्षा पर जोर
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस बड़े पैमाने पर होने वाली पदोन्नति से वन रक्षियों का मनोबल बढ़ेगा. साथ ही राज्य में वनों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी. फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहन मिलने से विभागीय कार्यक्षमता भी बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है.
वन रक्षियों की पदोन्नति लंबे समय से लंबित मांग रही है. नियमावली लागू होने और सूची तैयार होने के बाद अब प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंचती दिख रही है. यदि अधिसूचना समय पर जारी होती है तो यह कदम न केवल कर्मचारियों के लिए राहत भरा होगा बल्कि झारखंड में वन संरक्षण व्यवस्था को भी स्थायित्व और मजबूती प्रदान करेगा.