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  • 2026-01-20

Jamshedpur News: टाटा नगर स्टेशन अतिक्रमण मामले में हाइकोर्ट की अहम टिप्पणी "दुकानें रेलवे ने लीज पर दी, यह अतिक्रमण नहीं", 20 फरवरी को होगी अगली सुनवाई

Jamshedpur News: टाटानगर रेलवे स्टेशन से कीताडीह तक सड़क किनारे बची दुकानों और गोलपहाड़ी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई फिलहाल आगे नहीं बढ़ेगी. झारखंड हाइकोर्ट में मंगलवार को इस मामले की दोबारा सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि संबंधित दुकानें रेलवे की ओर से लीज पर दी गई थीं और इन्हें सीधे अतिक्रमण की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता. मामले में अब अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी.


हाइकोर्ट का रुख, लीज वाली दुकानों को अतिक्रमण नहीं माना

मंगलवार की सुनवाई में दुकानदारों की ओर से दायर याचिका पर विस्तार से बहस हुई. हाइकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जिन दुकानों को रेलवे ने लीज पर दिया था, उन्हें अतिक्रमण बताकर हटाया जाना उचित नहीं है. अदालत ने यह भी कहा कि जिस तरह झाड़ग्राम में रेलवे की जमीन से हटाए गए दुकानदारों को वैकल्पिक जगह दी गई थी, उसी तर्ज पर यहां भी जिन दुकानों पर बुलडोजर चलना प्रस्तावित है, उन्हें दुकान उपलब्ध कराई जानी चाहिए.

इससे पहले सोमवार को हुई सुनवाई अधूरी रहने के कारण अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर रोक लगी हुई थी. मंगलवार की सुनवाई के बाद भी फिलहाल स्थिति यथावत बनी हुई है. अदालत के रुख को देखते हुए अगली सुनवाई तक किसी भी तरह की तोड़फोड़ या हटाने की कार्रवाई नहीं किए जाने की संभावना जताई जा रही है.

अब भी बची हैं कई दुकानें
जानकारी के अनुसार स्टेशन से कीताडीह की ओर सड़क किनारे 14 से अधिक दुकानें अब भी हटाई जानी बाकी हैं. वहीं गोलपहाड़ी क्षेत्र में भी करीब पांच दुकानें अतिक्रमण की जद में बताई गई हैं. हाइकोर्ट से अंतिम स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही प्रशासन मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की नई तैनाती कर आगे की कार्रवाई करेगा.

20 फरवरी की सुनवाई पर टिकी निगाहें
अब पूरे मामले में दुकानदारों और प्रशासन की निगाहें 20 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं. इसी सुनवाई के बाद यह साफ हो पाएगा कि शेष दुकानों को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाएंगे और वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर क्या दिशा तय होती है.

हाइकोर्ट की टिप्पणी ने इस मामले को सिर्फ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से आगे ले जाकर पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था के सवाल से जोड़ दिया है. लीज का मुद्दा मजबूत होने से दुकानदारों को राहत मिली है, वहीं रेलवे और प्रशासन के लिए आगे की कार्रवाई अब कानूनी दिशा निर्देशों पर निर्भर हो गई है.

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