Latehar News: मनिका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में आयोजित महिला बंध्याकरण शिविर के दौरान स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता सामने आई है. ऑपरेशन के बाद उपचार और विश्राम की समुचित व्यवस्था न होने के कारण कई महिलाओं को अस्पताल के फर्श पर रात बिताने के लिए मजबूर होना पड़ा. यह घटना सरकारी स्वास्थ्य मानकों और मरीजों की गरिमा के खुले उल्लंघन के रूप में सामने आई है.
मरीजों को बेड, साफ चादर, दवाइयाँ और चिकित्सकीय निगरानी उपलब्ध नहीं
सूत्रों के अनुसार, निर्धारित प्रक्रिया के तहत बंध्याकरण ऑपरेशन के बाद मरीजों को बेड, साफ चादर, दवाइयों और चिकित्सकीय निगरानी उपलब्ध कराई जानी चाहिए थी. लेकिन अस्पताल के वार्ड में बेड की भारी कमी के चलते कई महिलाएं दर्द और कमजोरी की स्थिति में जमीन पर लेटी रहीं. मौके पर मौजूद परिजनों ने बताया कि अस्पताल कर्मियों को बार-बार अव्यवस्था की जानकारी दी गई, लेकिन कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई.
लेकिन बुनियादी सुविधाओं का आभाव
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ऑपरेशन के बाद महिलाओं को वार्ड में शिफ्ट तो किया गया, लेकिन बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव था. न तो अतिरिक्त बेड उपलब्ध कराए गए और न ही मरीजों की स्थिति को लेकर गंभीरता दिखाई गई. इससे स्वास्थ्य केंद्र की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर सवाल खड़े हो गए हैं.
घटना की जानकारी मिलने के बाद सांसद प्रतिनिधि अंकित राज ने मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे गंभीर लापरवाही बताया. उन्होंने जिला स्वास्थ्य प्रशासन से पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.
यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति को उजागर करती है. अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस मामले में ठोस कार्रवाई कर व्यवस्था सुधार पाएगा, या यह मामला भी अन्य घटनाओं की तरह औपचारिक जांच तक सीमित रह जाएगा.