Death At Will: कई बार कोई व्यक्ति गंभीर बीमारी या असहनीय दर्द से लंबे समय तक जूझता रहता है. ऐसी स्थिति में उसके परिवार या स्वयं व्यक्ति द्वारा जीवन समाप्त करने की इच्छा जताई जाती है. इसी प्रक्रिया को इच्छामृत्यु कहा जाता है. इसका उद्देश्य मरीज को असहनीय पीड़ा से राहत दिलाना होता है.
इच्छामृत्यु के प्रकार
इच्छामृत्यु मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है—
1. सक्रिय इच्छामृत्यु (Active Euthanasia)
इसमें मरीज को ऐसी दवा या इंजेक्शन दिया जाता है, जिससे उसकी मृत्यु हो जाती है. यह तरीका जानबूझकर जीवन समाप्त करने से जुड़ा होता है.
2. निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia)
इसमें मरीज का इलाज बंद कर दिया जाता है या उसे जीवन रक्षक मशीनों (जैसे वेंटिलेटर) से हटाया जाता है. इसके बाद कुछ समय में मरीज की स्वाभाविक रूप से मृत्यु हो जाती है.
भारत में इच्छामृत्यु पर कानून
भारत में केवल निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति है, जबकि सक्रिय इच्छामृत्यु कानूनन अपराध है.
सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2018 में एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कुछ शर्तों के साथ निष्क्रिय इच्छामृत्यु को मान्यता दी. इसके अनुसार:
• मरीज लाइलाज बीमारी से पीड़ित होना चाहिए.
• उसके ठीक होने की कोई संभावना नहीं होनी चाहिए.
• मरीज की लिविंग विल (पूर्व इच्छा पत्र) मौजूद होना जरूरी है.
• मेडिकल बोर्ड की मंजूरी के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाता है.
हालिया मामला जो चर्चा में है
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में रहने वाले एक दंपति ने अपने बेटे के लिए सुप्रीम कोर्ट में इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी है. उनका बेटा पिछले लगभग 12 वर्षों से कोमा में है. इस याचिका पर अब देश की सर्वोच्च अदालत का फैसला आना बाकी है.
किन देशों में इच्छामृत्यु को मंजूरी है?
दुनिया के कई देशों में इच्छामृत्यु को कानूनी मान्यता दी गई है. इनमें प्रमुख देश हैं - ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, बेल्जियम, नीदरलैंड, स्पेन, न्यूजीलैंड, लक्जमबर्ग, कोलंबिया, पुर्तगाल और इक्वाडोर.
हालांकि, इन देशों में भी इच्छामृत्यु की अनुमति कड़े नियमों और मेडिकल विशेषज्ञों की जांच के बाद ही दी जाती है.
अगर चाहें तो मैं इसे और छोटा, और ज्यादा न्यूज़ स्टाइल, या और ज्यादा सरल भाषा में भी लिख दूँ.