Jharkhand Railway News: भारतीय रेलवे में आरक्षित कोचों में बढ़ती भीड़ और अव्यवस्था को लेकर यात्रियों की नाराज़गी लगातार बढ़ रही है. इसी बीच 08 मई 2026 को ट्रेन संख्या 12810 में सामने आए एक मामले ने फिर से रेलवे की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
क्या है पूरा मामला?
आरोप है कि ट्रेन संख्या 12810 में एक यात्री केवल जनरल टिकट लेकर यात्रा कर रहा था. जांच के दौरान टिकट परीक्षक (TTE) ने उससे जुर्माना वसूला और इसके बाद उसे स्लीपर कोच S1 में यात्रा करने की अनुमति दे दी.
इस घटना के बाद कई आरक्षित टिकट वाले यात्रियों ने सवाल उठाए कि जब बिना रिजर्वेशन वाले यात्री जुर्माना देकर स्लीपर कोच में सफर कर सकते हैं, तो फिर महीनों पहले टिकट बुक कराने का क्या फायदा रह जाता है?
आरक्षित यात्रियों ने उठाए बड़े सवाल
यात्रियों का कहना है कि वे कन्फर्म सीट पाने के लिए महीनों पहले टिकट बुक करते हैं और कई बार तत्काल व प्रीमियम तत्काल में अधिक किराया भी चुकाते हैं, ताकि आरामदायक और सुरक्षित यात्रा मिल सके.
लेकिन अगर जनरल टिकट वाले यात्रियों को भी ऑनबोर्ड जुर्माना लेकर आरक्षित कोचों में प्रवेश दिया जाता है, तो इससे रिजर्वेद कोच की पूरी व्यवस्था कमजोर होती दिख रही है.
बढ़ती भीड़ और यात्रियों की परेशानी
यात्रियों का आरोप है कि इसी तरह की व्यवस्थाओं के कारण स्लीपर और अन्य आरक्षित कोचों में लगातार भीड़ बढ़ रही है. इससे कन्फर्म सीट वाले यात्रियों को परेशानी होती है, रात में आराम से यात्रा करना मुश्किल हो जाता है, सुरक्षा और सुविधा दोनों प्रभावित होती हैं साथ ही कोचों में अनावश्यक भीड़ और विवाद की स्थिति बनती है.
कई यात्रियों ने रेलवे मंत्रालय से मांग की है कि रिजर्वेद कोचेस में केवल वैध आरक्षित टिकट वाले यात्रियों को ही यात्रा की अनुमति दी जाए और नियमों को सख्ती से लागू किया जाए.