Jharkhand News: पश्चिम सिंहभूम के सारंडा जंगल में ऑपरेशन मेघाबुरू के तहत बड़ी कार्रवाई के बाद अब सुरक्षाबलों का फोकस बचे हुए नक्सलियों पर है. 8 इनामी समेत 17 नक्सलियों के मारे जाने के बाद सुरक्षाबलों ने जंगल में सक्रिय शेष दस्तों को खत्म करने की रणनीति तेज कर दी है. इसके लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है और जीपीएस ड्रोन से लगातार निगरानी की जा रही है.
ड्रोन ट्रैकिंग से चिन्हित हो रहे ठिकाने
सुरक्षा एजेंसियां जीपीएस ड्रोन के जरिए जंगल के भीतर नक्सलियों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं. ड्रोन से संभावित ठिकानों की पहचान कर उन पर लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है. इसके बाद कोबरा के जवानों को चिन्हित इलाकों में भेजा जा रहा है, ताकि नक्सलियों को घेरकर निर्णायक कार्रवाई की जा सके.
मिसिर बेसरा और असीम मंडल का दस्ता अब भी सक्रिय
सूत्रों के अनुसार सारंडा क्षेत्र में अब भी 2 करोड़ 20 लाख के इनामी दो बड़े नक्सली मिसिर बेसरा और असीम मंडल का दस्ता सक्रिय है. इनके अलावा अजय महतो और रामप्रसाद मार्डी जैसे अन्य बड़े नक्सलियों की मौजूदगी भी अलग अलग इलाकों में बताई जा रही है. मुठभेड़ में प्रतिराम माझी के मारे जाने के बाद इन नक्सलियों के सामने आत्मसमर्पण ही एकमात्र विकल्प माना जा रहा है. आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम सिंहभूम में पहले 65 बड़े नक्सली सक्रिय थे, जिनमें अब 50 से कम बचे हैं.
सुरक्षाबलों का सर्च ऑपरेशन और तेज
2 करोड़ 35 लाख के इनामी भाकपा माओवादी के पोलित ब्यूरो सदस्य प्रतिराम माझी समेत 17 नक्सलियों के मारे जाने के बाद सुरक्षाबलों के हौसले बुलंद हैं. इसके बाद से सारंडा जंगल में सर्च ऑपरेशन को और तेज कर दिया गया है. इस अभियान में चाईबासा पुलिस के साथ झारखंड जगुआर, सीआरपीएफ और कोबरा के बड़ी संख्या में जवान शामिल हैं.
मुठभेड़ के बाद जंगल इलाकों में हालात सामान्य
छोटानागरा थाना क्षेत्र के कुमडी इलाके में बुधवार रात से शुक्रवार शाम तक करीब 36 घंटे चली मुठभेड़ के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल बन गया था. सुरक्षाबलों ने लोगों को जंगल में जाने से रोका था और कई ग्रामीण गांव छोड़कर दूसरे इलाकों में चले गए थे. शनिवार को जंगल से शव निकाले जाने और मुठभेड़ रुकने के बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने लगी है. अब लोग वापस अपने घर लौटने लगे हैं और बाहर निकलने पर लगी पाबंदियां भी हटा ली गई हैं.
17 नक्सलियों में से 4 के शव परिजन ले गए
मुठभेड़ में मारे गए 17 नक्सलियों के शवों का पोस्टमार्टम रविवार को भी जारी रहा. अब तक 13 शवों का पोस्टमार्टम किया जा चुका है. चार शव परिजन ले गए हैं, जिनमें खूंटी अड़की के राजेश मुंडा और उनकी पत्नी बबिता, गिरिडीह पीरटांड़ निवासी एक करोड़ के इनामी अनल दा उर्फ प्रतिराम मांझी और तांतनगर के इलीगढ़ निवासी बुलबुल आलडा शामिल हैं. पुलिस अधीक्षक अमित रेनू ने बताया कि सभी मृत नक्सलियों के परिजनों से संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों के माध्यम से संपर्क किया गया है. जो शव परिजन नहीं ले जाएंगे, उनके संबंध में विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी.
सारंडा में लगातार हो रही कार्रवाइयों से यह साफ है कि सुरक्षाबल नक्सलियों की कमर तोड़ने के निर्णायक चरण में पहुंच चुके हैं. ड्रोन जैसी तकनीक के इस्तेमाल से नक्सलियों की छिपने की जगहें सिमट रही हैं. बड़े कमांडरों के मारे जाने से संगठन पर दबाव बढ़ा है और आत्मसमर्पण की संभावना भी मजबूत हो रही है. आने वाले दिनों में यह अभियान नक्सल प्रभावित इलाकों में स्थायी शांति की दिशा में अहम साबित हो सकता है.