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  • 2026-01-28

Rang De Basanti Special Screening: 20 साल बाद फिर बड़े पर्दे पर “रंग दे बसंती”, कास्ट और क्रू के साथ होगी स्पेशल स्क्रीनिंग

Rang De Basanti Special Screening: भारतीय सिनेमा में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो समय के साथ और गहरी हो जाती हैं. रंग दे बसंती भी उन्हीं फिल्मों में शामिल है. युवाओं की सोच को झकझोर देने वाली यह फिल्म अब अपने रिलीज के 20 साल पूरे कर चुकी है और इस मौके को खास बनाने के लिए फिल्म से जुड़े कलाकार और निर्माता एक बार फिर साथ नजर आएंगे.

20वीं सालगिरह पर मुंबई में खास आयोजन
26 जनवरी 2006 को रिलीज हुई रंग दे बसंती के 20 साल पूरे होने पर 30 जनवरी को मुंबई में एक स्पेशल स्क्रीनिंग रखी गई है. इस स्क्रीनिंग में फिल्म की पूरी टीम को आमंत्रित किया गया है ताकि दो दशक पहले शुरू हुए उस सिनेमाई सफर को एक बार फिर याद किया जा सके. यह आयोजन फिल्म से जुड़े लोगों के लिए भावनात्मक पल लेकर आने वाला है.

इन कलाकारों की मौजूदगी की पुष्टि
मिली जानकारी के अनुसार इस खास स्क्रीनिंग में निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा के साथ आमिर खान, सिद्धार्थ सूर्यनारायण, सोहा अली खान, कुणाल कपूर और अतुल कुलकर्णी शामिल होंगे. लंबे समय बाद सभी कलाकार एक साथ उसी फिल्म को बड़े पर्दे पर देखेंगे जिसने उन्हें दर्शकों से एक खास रिश्ता दिया था.

क्यों खास मानी जाती है रंग दे बसंती
रंग दे बसंती को सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक सोच माना जाता है. इस फिल्म ने देशभक्ति को पारंपरिक दायरे से बाहर निकालकर युवाओं के सवालों और गुस्से के जरिए दिखाया. आमिर खान, आर माधवन, सिद्धार्थ सूर्यनारायण, शरमन जोशी, कुणाल कपूर, सोहा अली खान, अनुपम खेर और अतुल कुलकर्णी की परफॉर्मेंस ने इसे कल्ट क्लासिक बना दिया. ए आर रहमान का संगीत आज भी लोगों की प्लेलिस्ट में बना हुआ है.

युवाओं को आज भी जोड़ती है कहानी
फिल्म की कहानी कुछ ऐसे युवाओं की है जो शुरुआत में राजनीति और सिस्टम से दूर रहते हैं. स्वतंत्रता सेनानियों पर डॉक्यूमेंट्री बनाते हुए वे सच्चाई और भ्रष्टाचार से टकराते हैं. यही टकराव उनकी सोच और जिंदगी की दिशा बदल देता है. इसी वजह से रंग दे बसंती आज भी युवाओं के बीच उतनी ही प्रासंगिक है जितनी 2006 में थी.

रंग दे बसंती की 20वीं सालगिरह पर होने वाली यह स्पेशल स्क्रीनिंग सिर्फ एक फिल्मी आयोजन नहीं है. यह उस दौर की याद है जब सिनेमा ने युवाओं से सीधे सवाल पूछे थे. दो दशक बाद भी फिल्म की प्रासंगिकता बताती है कि मजबूत कहानी और ईमानदार प्रस्तुति समय की कसौटी पर खरी उतरती है.
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