Jharkhand News: विशेष शिक्षा सहायक आचार्य संवर्ग की नियुक्ति और सेवा शर्तों से जुड़ी नियमावली को चुनौती देने वाली याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट ने फिलहाल किसी तरह की अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर न तो विज्ञापन पर रोक लगेगी और न ही नियुक्ति प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया जाएगा.
खंडपीठ ने क्या कहा
मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि नियुक्ति नियमावली राज्य सरकार की नीति का हिस्सा है. ऐसे मामलों में अदालत प्रारंभिक चरण में हस्तक्षेप नहीं कर सकती. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पूरी चयन प्रक्रिया इस रिट याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी.
प्रतिवादियों से जवाब तलब
कोर्ट ने जेएसएससी समेत सभी प्रतिवादियों को छह सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. वहीं याचिकाकर्ताओं को प्रतिवादियों के जवाब पर दो सप्ताह में प्रत्युत्तर दाखिल करने का समय दिया गया है. मामले की अगली सुनवाई आठ सप्ताह बाद तय की गई है.
याचिकाकर्ताओं की आपत्ति क्या है
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि नियुक्ति नियमावली के क्लाज 3 (च) में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को शैक्षणिक अर्हता यानी अंकों में किसी तरह की छूट नहीं दी गई है. इसी आधार पर नियमावली के साथ साथ इसके तहत जारी विज्ञापन को भी चुनौती दी गई है.
जेएसएससी का पक्ष
जेएसएससी की ओर से अदालत में कहा गया कि नियुक्ति नियमावली बनाने का अधिकार राज्य सरकार को है. आयोग इसी नियमावली के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है और इसमें कोई कानूनी खामी नहीं है. उल्लेखनीय है कि इसी नियमावली के तहत जेएसएससी झारखंड इंटरमीडिएट एंड ग्रेजुएट ट्रेंड स्पेशल एजुकेशन असिस्टेंट टीचर कंबाइंड कॉम्पिटेटिव एग्जामिनेशन विज्ञापन संख्या 8/2025 का आयोजन कर रहा है. यह परीक्षा कुल 3451 पदों पर नियुक्ति के लिए प्रस्तावित है.
हाईकोर्ट के रुख से साफ है कि फिलहाल नियुक्ति प्रक्रिया पर ब्रेक लगने की संभावना कम है. हालांकि अंतिम फैसला याचिका के निपटारे पर निर्भर करेगा. आरक्षण और शैक्षणिक अर्हता से जुड़े सवाल आने वाले समय में इस मामले को और संवेदनशील बना सकते हैं.