अंधेरे का फायदा उठाकर हुए रफूचक्कर
मिली जानकारी के अनुसार, घटना देर रात की है। बच्ची डरी-सहमी हुई रिनपास के गेट के पास खड़ी रो रही थी। स्थानीय लोगों की नजर जब उस अकेली बच्ची पर पड़ी, तो उन्होंने उससे पूछताछ की। बच्ची की हालत देखकर स्पष्ट था कि वह गहरे सदमे में है। ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस और संबंधित अधिकारियों को दी।
डालसा की त्वरित कार्रवाई, बच्ची को मिला सहारा
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण डालसा तुरंत हरकत में आया। डालसा सचिव राकेश रौशन ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए बच्ची की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए।सुरक्षित ठिकाना, पीएलवी भारती शाहदेव और दीपक मुंडा को बच्ची की तात्कालिक देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई। बच्ची को फिलहाल एक सुरक्षित धर्मशाला में रखा गया है। इस घटना की जानकारी चाइल्ड हेल्पलाइन, जिला बाल संरक्षण इकाई DCPO और बाल कल्याण समिति CWC को दे दी गई है।
समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी
यह घटना दर्शाती है कि समाज में बच्चों के प्रति संवेदनशीलता किस कदर कम होती जा रही है। मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के बाहर बच्ची को छोड़ना इस ओर भी इशारा करता है कि शायद माता-पिता बच्ची की किसी स्थिति से परेशान थे, लेकिन उसे इस तरह असुरक्षित छोड़ देना एक गंभीर अपराध है।अधिकारी अब सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय इनपुट के जरिए उन निर्दयी माता-पिता की तलाश कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि बच्ची को उचित काउंसिलिंग और संरक्षण दिया जाएगा।