Jharkhand News: डिजिटल निवेश के नाम पर आम लोगों को जाल में फंसाने वाले साइबर ठगों के खिलाफ झारखंड CID ने बड़ी कार्रवाई की है. रांची साइबर अपराध थाना में दर्ज मामले में 2.07 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के एक मुख्य आरोपी को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया गया है. इस कार्रवाई से साइबर ठगी के उस नेटवर्क पर से परदा उठा है, जो तकनीक के सहारे लोगों का भरोसा जीतकर उनकी जमा पूंजी हड़प रहा था.
फर्जी ग्रुप से शुरू हुआ खेल
पूरी ठगी की कहानी एक व्हाट्सएप ग्रुप से शुरू हुई, जिसका नाम DIGITAL ASSETS रखा गया था. इसी ग्रुप के माध्यम से पीड़ित को जोड़ा गया और नामी वित्तीय संस्थानों के नाम पर इन्वेस्टमेंट और ट्रेडिंग के आकर्षक ऑफर दिखाए गए. लगातार मैसेज और कॉल के जरिये भरोसा कायम किया गया और जल्द मुनाफे का सपना दिखाया गया.
नकली एप से दिखाया गया झूठा मुनाफा
पीड़ित का विश्वास जीतने के लिए GLOBIXVAULT नाम के एक फर्जी एप्लीकेशन का इस्तेमाल किया गया. इस एप में लगातार नकली लाभ दिखाया जाता रहा, जिससे पीड़ित को लगा कि उसका पैसा सुरक्षित है और तेजी से बढ़ रहा है. इसी भ्रम में आकर पीड़ित ने अलग अलग किश्तों में विभिन्न बैंक खातों में कुल 2.07 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए.
तकनीकी जांच से खुला ठिकाना
मामले की जांच के दौरान सीआईडी की टीम ने डिजिटल ट्रेल और तकनीकी इनपुट के आधार पर आरोपी तक पहुंच बनाई. इसके बाद पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना जिले में छापेमारी की गई. स्थानीय पुलिस के सहयोग से अभिषेक बेरा नामक युवक को गिरफ्तार किया गया, जिसके पास से ठगी से जुड़े कई डिजिटल साक्ष्य बरामद हुए हैं.
जांच के दायरे में अन्य कड़ियां
सीआईडी का मानना है कि यह ठगी किसी एक व्यक्ति का काम नहीं है बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है. गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के आधार पर अन्य सदस्यों और लेनदेन से जुड़े खातों की जांच तेज कर दी गई है.
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि साइबर ठग किस तरह आधुनिक तकनीक और फर्जी डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिये लोगों को बड़े मुनाफे का लालच देकर करोड़ों की ठगी कर रहे हैं. इस तरह की घटनाएं यह भी संकेत देती हैं कि ऑनलाइन निवेश से पहले पूरी जानकारी और सत्यापन बेहद जरूरी है, क्योंकि एक छोटी सी चूक बड़ी आर्थिक क्षति में बदल सकती है.