Jharkhand News: केंद्रीय जीएसटी और उत्पाद शुल्क विभाग की एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने टाटा स्टील लिमिटेड के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 658 करोड़ रुपये की वसूली का आदेश दिया है. यह आदेश CGST ऑडिट रिपोर्ट में सामने आई गड़बड़ियों के आधार पर दिया गया है.
दरअसल, विभाग ने टाटा स्टील की वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2022-23 तक की व्यावसायिक गतिविधियों और टैक्स भुगतान का ऑडिट किया था. ऑडिट के दौरान कई तरह की अनियमितताएं पाई गईं. इसके बाद विभाग ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसे टाटा स्टील ने संयुक्त आयुक्त की अदालत में चुनौती दी थी. लंबी सुनवाई के बाद संयुक्त आयुक्त ने विभाग के पक्ष में फैसला सुनाते हुए वसूली का आदेश दिया है.
आदेश के मुताबिक, टाटा स्टील को नियमों के उल्लंघन के कारण टैक्स, ब्याज और दंड की राशि चुकानी होगी. हालांकि, कंपनी ने पहले जो भी राशि जमा की है, उसे कुल देनदारी से घटाने के बाद शेष रकम की वसूली की जाएगी. टाटा स्टील इस आदेश के खिलाफ 90 दिनों के भीतर अपील भी कर सकती है.
ऑडिट में सामने आई प्रमुख गड़बड़ियां:
• सामग्री की खरीद-बिक्री में पिछली तारीख से कीमत बढ़ने के कारण बने अतिरिक्त टैक्स का भुगतान देर से किया गया.
• टैक्स के अंतर पर लगने वाला ब्याज समय पर नहीं चुकाया गया.
• कई मामलों में सप्लायर को इन्वॉयस की तारीख से 180 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया गया, इसके बावजूद इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ लिया गया.
• ITC को न तो रिवर्स किया गया और न ही उस पर ब्याज दिया गया.
• आयातित सामग्री पर रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (RCM) के तहत टैक्स और ब्याज का भुगतान देर से किया गया.
• कई मामलों में गलत तरीके से ITC लेने और उसे ब्लॉक न करने की बात सामने आई.
कानूनी आधार:
संयुक्त आयुक्त ने CGST अधिनियम की धारा 50, 73 और 74 के तहत वसूली का आदेश दिया है.
• धारा 50: टैक्स देर से जमा करने पर ब्याज.
• धारा 73: गलती से टैक्स कम जमा होने पर ब्याज और हल्का जुर्माना.
• धारा 74: जानबूझकर टैक्स चोरी या गलत जानकारी देने पर टैक्स, ब्याज और भारी दंड.
टाटा स्टील पर तय प्रमुख देनदारियां:
• टैक्स भुगतान में देरी पर 18.56 करोड़ रुपये ब्याज.
• सप्लायर को 180 दिन में भुगतान न करने पर 40.16 लाख रुपये ब्याज और 3.08 करोड़ रुपये दंड.
• गलत तरीके से 427.71 करोड़ रुपये का ITC बुक करने पर उतनी ही राशि का दंड.
• RCM के तहत 122.40 करोड़ रुपये की वसूली.
• अलग-अलग मामलों में गलत ITC लेने पर लाखों रुपये का टैक्स, ब्याज और दंड.
• RCM के तहत GST नहीं चुकाने, वाहन किराये, लीज रेंट, स्पॉन्सरशिप और GST रिवर्सल से जुड़े मामलों में भी ब्याज और दंड की वसूली.
संयुक्त आयुक्त ने साफ किया है कि पहले से जमा रकम को समायोजित करने के बाद बची हुई राशि की वसूली कानून के अनुसार की जाएगी.