Jamshedpur: कोल्हान प्रमंडल के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य संस्थान एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, जमशेदपुर में कार्यरत MBBS इंटर्न डॉक्टरों ने राज्य सरकार के समक्ष स्टाइपेंड में हो रहे कथित भेदभाव का मुद्दा जोर-शोर से उठाया है। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के बैनर तले इंटर्न डॉक्टरों ने बुधवार को अपनी पीड़ा साझा करते हुए इसे केवल आर्थिक समस्या नहीं, बल्कि सम्मान और मानसिक शोषण से जुड़ा गंभीर सवाल बताया।
इंटर्न डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री से सीधा किया सवाल
इंटर्न डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री से सीधा सवाल करते हुए कहा कि जब झारखंड के MBBS इंटर्न डॉक्टर बिहार और पश्चिम बंगाल के इंटर्न डॉक्टरों की तरह ही 36 घंटे तक लगातार ड्यूटी करते हैं, ICU, इमरजेंसी, OPD, वार्ड और पोस्टमार्टम जैसी जिम्मेदारियों को समान रूप से निभाते हैं, तो फिर उन्हें कम स्टाइपेंड क्यों दिया जा रहा है। इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि कार्यभार, जिम्मेदारी और जोखिम में कोई अंतर नहीं है, फिर भी भुगतान में भारी असमानता है।
कम स्टाइपेंड मानसिक दबाव और उत्पीड़न को दे रहा जन्म
डॉक्टरों ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि झारखंड के सबसे बड़े मेडिकल संस्थान RIMS, रांची में इंटर्न डॉक्टरों को अपेक्षाकृत सम्मानजनक स्टाइपेंड दिया जाता है, जबकि उसी राज्य के अन्य मेडिकल कॉलेजों जैसे एमजीएम जमशेदपुर में समान MBBS डिग्री और समान कार्य जिम्मेदारियों के बावजूद इंटर्न को काफी कम राशि पर काम करने को मजबूर किया जा रहा है। इंटर्न डॉक्टरों ने इसे सीधी-सीधी असमानता बताते हुए कहा कि यह हालात मानसिक दबाव और उत्पीड़न को जन्म दे रहे हैं।
इंटर्न डॉक्टरों ने सवाल उठाया
इंटर्न डॉक्टरों ने सवालिया लहजे में कहा, “क्या हमारे मरीज अलग हैं? क्या हमारी नाइट ड्यूटी कम होती है? क्या ICU और इमरजेंसी में हमारी जिम्मेदारी कम है?” उन्होंने कहा कि वे भी वही खून-पसीना बहाते हैं, वही मौत और आपात स्थितियां देखते हैं और वही शारीरिक व मानसिक थकान झेलते हैं, जो किसी भी बड़े संस्थान के इंटर्न डॉक्टर झेलते हैं। इसके बावजूद उन्हें कम आंकना बेहद दुखद है।
झारखंड के इंटर्न डॉक्टर आर्थिक तंगी से परेशान
इंटर्न डॉक्टरों ने झारखंड राज्य गठन के उद्देश्य को याद दिलाते हुए कहा कि यह अलग राज्य इसलिए बना था ताकि यहां के युवाओं को बराबरी, सम्मान और न्याय मिल सके, न कि उन्हें अपने ही देश के पड़ोसी राज्यो बिहार और पश्चिम बंगाल के मुकाबले कम अधिकार और सुविधाएं दी जाएं। उन्होंने कहा कि जहां बिहार और पश्चिम बंगाल में इंटर्न डॉक्टरों को बेहतर स्टाइपेंड मिल रहा है, वहीं झारखंड के इंटर्न डॉक्टर आर्थिक तंगी में काम करने को मजबूर हैं।
इंटर्न डॉक्टरों की मांग किसी विलासिता से नहीं जुड़ी
इंटर्न डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी विलासिता से जुड़ी नहीं है। वे सिर्फ इतना स्टाइपेंड चाहते हैं, जिससे वे हॉस्टल या कमरे का किराया चुका सकें, जरूरी मेडिकल किताबें और सामग्री खरीद सकें और उन्हें हर छोटी जरूरत के लिए घर से पैसे न मांगने पड़ें। डॉक्टरों का कहना है कि सम्मानजनक स्टाइपेंड उन्हें आत्मसम्मान के साथ काम करने की ताकत देता है।
इंटर्न डॉक्टर सबसे कम स्टाइपेंड क्यों
इस दौरान इंटर्न डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री के हालिया दावोस दौरे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब राज्य सरकार झारखंड को वैश्विक मंच पर एक विश्वस्तरीय और निवेश के लिए आकर्षक राज्य के रूप में पेश कर रही थी, उसी समय राज्य के इंटर्न डॉक्टर अपने कमरे के किराए और रोजमर्रा के खर्चों का हिसाब लगाने को मजबूर थे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब स्वास्थ्य क्षेत्र को दुनिया के सामने एक मजबूत सिस्टम के रूप में दिखाया जा रहा है, तो उसी सिस्टम की नींव माने जाने वाले इंटर्न डॉक्टर सबसे कम स्टाइपेंड क्यों पा रहे हैं।
MBBS इंटर्न डॉक्टरों को RIMS, रांची के बराबर स्टाइपेंड दें
एमजीएम अस्पताल में कार्यरत इंटर्न डॉक्टरों ने एक स्वर में मांग की कि झारखंड के सभी MBBS इंटर्न डॉक्टरों को कम से कम RIMS, रांची के बराबर स्टाइपेंड दिया जाए और यह राशि बिहार एवं पश्चिम बंगाल से किसी भी स्थिति में कम न हो। डॉक्टरों ने चेतावनी देते हुए कहा कि आर्थिक तनाव में काम कर रहा इंटर्न न सिर्फ खुद टूटता है, बल्कि इसका सीधा असर पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ता है।
इंटर्न डॉक्टरों ने सरकार से की अपील
अंत में इंटर्न डॉक्टरों ने सरकार से अपील की कि वह इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करते हुए समय रहते ठोस निर्णय ले, क्योंकि यह कोई अतिरिक्त मांग नहीं, बल्कि उनका हक और अधिकार है।