Bihar: बिहार की राजनीति में शुक्रवार देर रात उस वक्त बड़ा बवाल खड़ा हो गया, जब पूर्णिया सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को पटना पुलिस ने उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी करीब 35 साल पुराने एक आपराधिक मामले में जमानत की शर्तो के उल्लंघन के बाद की गई। लेकिन गिरफ्तारी से ज्यादा चर्चा में रही, आधी रात का हाई-वोल्टेज ड्रामा, जिसने पूरे पटना को सियासी हलचल में डाल दिया।
दिल्ली से लौटते ही पहुंची पुलिस
जानकारी के अनुसार, पप्पू यादव शुक्रवार रात करीब 11 बजे लोकसभा सत्र समाप्त होने के बाद दिल्ली से पटना पहुंचे ही थे, कि उसी दौरान पटना पुलिस की एक बड़ी टीम उनके सरकारी आवास पर पहुंच गई। पुलिस टीम का नेतृत्व सिटी एसपी पश्चिम भानु प्रताप सिंह और एसएसपी कार्तिकेय शर्मा कर रहे थे।
बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई में पांच थानों की पुलिस, कई अधिकारी सिविल ड्रेस में और भारी संख्या में जवान मौजूद थे।
"मुझे मारने आए हैं पप्पू यादव का आरोप"
जैसे ही पुलिस ने सांसद को हिरासत में लेने की कोशिश की, माहौल तनावपूर्ण हो गया। पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि पुलिस ने गिरफ्तारी वारंट नहीं दिखाया, बल्कि केवल संपत्ति कुर्की से जुड़े दस्तावेज सामने रखे। उन्होंने कहा,
“मुझे लगा ये अपराधी हैं। आधी रात को इतने लोग घर में घुस आए, कौन विश्वास करेगा कि ये पुलिस है? ये मुझे मारने आए हैं।”
पप्पू यादव बार-बार सवाल उठाते रहे कि क्या वह कोई अपराधी हैं, जिनके साथ इस तरह का व्यवहार किया जा रहा है।
समर्थकों का उग्र विरोध, पुलिस वाहनों पर चढ़े कार्यकर्ता
गिरफ्तारी की खबर फैलते ही पप्पू यादव के समर्थक मौके पर जुट गए। हालात इतने बिगड़ गए कि कुछ कार्यकर्ता पुलिस की गाड़ियों पर चढ़ गए व नारेबाजी शुरू हो गई और पुलिस से तीखी बहस देखने को मिली। पूरे इलाके में देर रात अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
"सुबह कोर्ट जाऊंगा, रात में थाने नही" पप्पू यादव की मांग
ड्रामे के दौरान पप्पू यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे सुबह खुद कोर्ट में पेश होने को तैयार हैं, लेकिन रात में पुलिस स्टेशन नहीं जाएंगे। उन्होंने पुलिस से आग्रह किया कि चाहें तो उन्हें हाउस अरेस्ट कर लिया जाए, लेकिन पुलिस इस प्रस्ताव पर राजी नहीं हुई।
कई घंटों की मशक्कत और तनाव के बाद आखिरकार पुलिस ने सांसद को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उनकी तबीयत को देखते हुए उन्हें आईजीआईएमएस अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया।
क्या है 1995 का विवादित मामला?
यह पूरा मामला गर्दनीबाग थाना क्षेत्र से जुड़ा है और इसकी जड़ें साल 1995 तक जाती हैं। इस केस के शिकायतकर्ता मकान मालिक विनोद बिहारी लाल हैं। आरोप है कि पप्पू यादव ने मकान निजी उपयोग के नाम पर किराए पर लिया, लेकिन बाद में उसे राजनीतिक कार्यालय के रूप में इस्तेमाल करने लगे।
जब मकान मालिक को इसकी जानकारी हुई, तो विवाद बढ़ गया। इसके बाद पप्पू यादव पर धोखाधड़ी, जालसाजी, अवैध रूप से घर में घुसने, आपराधिक धमकी और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। यह मामला फिलहाल MP-MLA विशेष अदालत में विचाराधीन है।
कोर्ट में गैरहाजिरी बनी गिरफ्तारी की वजह
पुलिस का कहना है कि सांसद पप्पू यादव बार-बार कोर्ट में पेश नहीं हो रहे थे, जबकि वह इस केस में जमानत पर थे। इसी को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई।
पप्पू यादव ने बताया "राजनीतिक साजिश"
वहीं, पप्पू यादव ने अपनी गिरफ्तारी को पूरी तरह राजनीतिक साजिश करार दिया है। उनका दावा है कि उन्होंने हाल ही में पटना में नीट छात्र की मौत, गर्ल्स हॉस्टल से जुड़े मामलों और अन्य संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को घेरा था, जिससे नाराज होकर उन्हें दबाने की कोशिश की जा रही है।
आगे क्या?
फिलहाल पप्पू यादव पुलिस हिरासत में हैं और उन्हें शनिवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि उन्हें जमानत मिलती है या न्यायिक हिरासत बढ़ाई जाती है।
इस गिरफ्तारी ने बिहार की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं।