इन मामलों में “डिजिटल अरेस्ट”, फर्जी निवेश योजनाएं और बैंक अधिकारी बनकर की गई ठगी जैसे नए-नए हथकंडे सामने आए हैं। पुलिस और प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, संदिग्ध लिंक या बेहद आकर्षक निवेश प्रस्ताव से सावधान रहें।
मामला 1: मानगो के हिल बिहार कॉलोनी में ₹56 लाख की ठगी
मानगो स्थित हिल बिहार कॉलोनी निवासी प्रमोद शर्मा को एक शातिर ठग ने खुद को IPS अधिकारी बताकर ठग लिया। 20 दिसंबर 2025 को आए कॉल में कहा गया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल मुंबई में आपराधिक गतिविधियों में हुआ है। विश्वास दिलाने के लिए पुलिस वर्दी में एक व्यक्ति ने वीडियो कॉल कर खुद को “IPS विजय खन्ना” बताया। डर के माहौल में प्रमोद शर्मा ने जनवरी महीने में तीन किस्तों में ₹56 लाख ट्रांसफर कर दिए, जिसके बाद ठगों के नंबर बंद हो गए।
मामला 2: माधवबाग कॉलोनी में बुजुर्ग से ₹54.95 लाख की ठगी
माधवबाग कॉलोनी में एक बुजुर्ग व्यक्ति को फर्जी बैंक अधिकारी ने “पेंशन क्रेडिट कार्ड” का झांसा दिया। केवल एक OTP साझा करते ही ठगों ने उनके खाते पर कब्ज़ा कर लिया और जनवरी के अंत में लगातार चार दिनों में ₹54.95 लाख निकाल लिए।
मामला 3: गोविंदपुर में शेयर बाजार के नाम पर ठगी
गोविंदपुर निवासी आकाश कुमार को कथित RBK शेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के प्रतिनिधि बनकर ठगा गया। उनसे आधार विवरण लेकर खाता खुलवाया गया और ऊंचे रिटर्न का लालच देकर ₹4.49 लाख की राशि हड़प ली गई।
मामला 4: कदमा के भाटिया बस्ती में टेलीग्राम निवेश जाल
कदमा के भाटिया बस्ती निवासी एक युवक को टेलीग्राम पर निवेश का ऑफर दिया गया। कहा गया कि कंपनी बड़े भारतीय निवेशकों द्वारा समर्थित है। दिए गए लिंक पर क्लिक करते ही उसके बैंक खाते से ₹2.87 लाख की अनधिकृत निकासी हो गई।
इन सभी मामलों की जांच जमशेदपुर साइबर थाना द्वारा की जा रही है। बार-बार आधार जानकारी के दुरुपयोग और “डिजिटल अरेस्ट” जैसे मामलों का सामने आना यह साफ संकेत देता है कि साइबर सतर्कता अब हर नागरिक की ज़रूरत बन चुकी है।