Jharkhand News: झारखंड प्रशासनिक सेवा के 12 अधिकारी पिछले छह महीने से पदस्थापन की प्रतीक्षा में बैठे हुए हैं. 29 जुलाई 2025 को कार्मिक विभाग द्वारा इनकी सेवा ग्रामीण विकास विभाग को सौंप दी गई थी, लेकिन अब तक किसी भी प्रखंड में इनकी तैनाती नहीं की गई है. इस देरी के कारण राज्य के कई प्रखंडों में नियमित बीडीओ का अभाव बना हुआ है.
प्रशासनिक उदासीनता का मामला
सूत्रों के अनुसार, ये अधिकारी वर्तमान में विभागीय मुख्यालय या अन्य कार्यालयों में बिना किसी स्पष्ट कार्य के तैनात हैं. इसके बावजूद उन्हें नियमित वेतन का भुगतान किया जा रहा है. दिसंबर में हुई पदस्थापन प्रक्रिया में भी इन्हें शामिल नहीं किया गया, जिससे स्थिति और जटिल हो गई. बताया जा रहा है कि इन अधिकारियों की पदस्थापना से संबंधित फाइल अब भी उच्च स्तर पर लंबित है. सहमति नहीं बनने के कारण नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है.
प्रखंडों में नियमित बीडीओ का अभाव
राज्य के कई प्रखंडों में अब भी नियमित बीडीओ की पदस्थापना नहीं है. वहां अंचल अधिकारी या अन्य अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार देकर काम चलाया जा रहा है. अतिरिक्त जिम्मेदारियों के कारण ये अधिकारी प्रखंड स्तरीय कार्यों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दे पा रहे हैं.
योजनाओं पर पड़ रहा सीधा असर
नियमित बीडीओ के अभाव से निम्न योजनाओं के क्रियान्वयन पर प्रभाव पड़ रहा है-
- मनरेगा
- प्रधानमंत्री आवास योजना
- सामाजिक सुरक्षा पेंशन
- पंचायत समन्वय
- अन्य विकास योजनाएं
लाभुकों की बढ़ी परेशानी
ग्रामीण क्षेत्रों में लाभुकों को प्रमाण पत्र, स्वीकृति आदेश और भुगतान के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. इससे आम लोगों में नाराजगी बढ़ रही है और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
पदस्थापन में हो रही देरी से न केवल प्रशासनिक संसाधनों का दुरुपयोग हो रहा है, बल्कि ग्रामीण विकास योजनाओं की गति भी प्रभावित हो रही है. यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो इसका सीधा असर जमीनी स्तर पर शासन और जनता के विश्वास पर पड़ेगा.